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मां काली को लगा चूड़ा-चीनी का भोग

3 वर्ष पहले
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यदि आप एयरपोर्ट की ओर जा रहे हैं, तो डिवाइडर पर सजी पताकाएं आपका स्वागत करेंगी ही। इंदिरा पैलेस के पास से रंग-बिरंगी रोशनी के बीच भक्तों की वो कतार आस्था में झिलमिल दिखाई देगी, जिसका एक ही लक्ष्य है, एक झलक ही सही मां काली के दर्शन हो जाएं। जैसे-जैसे मनीटोला काली मंदिर की ओर पग बढ़ते हैं, कोलकाता के चंदन नगर से आए कारीगरों के परिश्रम का सुफल दिखने लगता है।

जय मां काली जगदंबा ट्रस्ट की ओर से शुरू तीन दिवसीय बड़ा पूजा महोत्सव का मंगलवार को दूसरा दिन था। मन्नतों की पोटली लिए मां के दरबार में भक्त देर रात से ही पहुंचने लगे थे। तड़के 02 बजे मां काली की महाआरती के बाद पट खोल दिए गए। पूजा-अराधना आरंभ हुई। पुजारी पवन पासवान ने अनुष्ठान संपन्न कराए। माता की पूजा में बगैर किसी मंत्रोच्चार के चूड़ा-चीनी का भोग चढ़ाया गया। भक्तों ने शांतिपूर्वक ढंग से मां काली के दर्शन किए। सुख-शांति की कामना की। संध्या 06 बजे भी मां की आरती की गई।

मां काली की पूजा करते पुजारी पवन पासवान।

सीपी सिंह, रवींद्र राय और सुबोध भी पहुंचे

मां के दरबार में माथा टेकने नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, सांसद रवींद्र राय, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, विनय सिन्हा दीपू, भाजपा नेता दीपक प्रकाश, सीमा शर्मा, और डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय भी पहुंचे। आयोजन को सफल बनाने में मंदिर ट्रस्ट के सचिव पवन पासवान, दिनेश सिंह, वीरेंद्र प्रधान, नंदकिशोर जायसवाल, अशोक राय, सुबोध सिंह, मुन्ना उरांव, राजू कक्कड़, साकेत गुप्ता आदि सहयोग कर रहे हैं।

चुटिया में नौ दिनी की श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ और पंचकुंडीय महायज्ञ का शुरू

बैंड-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा, राधा-कृष्ण की झांकी भी।

रांची | रांची की सबसे पुरानी बस्ती में मंगलवार का दिन नया सवेरा लेकर आया। जिसमें अध्यात्म का उत्साह था, श्रद्धा की कांतिमय पंक्ति थी, जो प्राचीन श्रीराम मंदिर से आरंभ होकर अपर चुटिया होते हुए केतार बागान स्थित कथास्थल वृंदावनधाम तक पहुंची। बात शोभायात्रा की ही है, जिसके साथ 9 दिनी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ और पंचकुंडीय महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। आयोजन श्रीभागवत सेवा समिति ने किया है। सबसे पहले बच्चे-युवाओं की टोली बैंड बाजे बजाते हुए। माथे पर कलश संभाले सुहागिन महिलाओं की अंतहीन कतार। वहीं राधा-कृष्ण की झांकी मोहित करती रही। पालकी पर विराजमान चंद्रपुर महाराष्ट्र से आए हुए कथावाचक मनीष भाई महाराज आशीष लुटाते रहे। यात्रा से पूर्व पूजा-अर्चना की गई थी। शोभायात्रा के कथा स्थल पहुंचने के बाद श्रीमद् भावगत कथा शुरू हुई।

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