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आज से 1 माह तक नहीं होंगे संस्कार, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान के लिए उत्तम

3 वर्ष पहले
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पंचांग के अनुसार बुधवार से खरमास शुरू हो रहा है। इस वर्ष दो ज्येष्ठ माह होंगे। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से साल के 365 दिनों में ही ये तिथियां भी शामिल होंगी। पंचांगानुसार तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है।

तिथियों का क्षय होते-होते तीसरे वर्ष एक माह बन जाता है : तिथियों का क्षय होते-होते तीसरे वर्ष एक माह बन जाता है। इस कारण हर तीसरे वर्ष अधिक मास होता है। अधिक मास को मलमास, पुरुषोत्तम मास नामों से पुकारा जाता है। जिस चंद्र मास में सूर्य संक्राति नहीं होती, वह अधिक मास कहलाता है और जिस चंद्र मास में दो संक्रांतियों का संक्रमण हो रहा हो उसे क्षय मास कहते हैं। इसके लिए मास की गणना शुक्ल प्रतिपदा से अमावस्या तक की गई है। अधिक मास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। लेकिन, धार्मिक अनुष्ठान कथाओं के लिए यह महीना उत्तम माना जाता है।

इससे पहले 2007 में ज्येष्ठ में अधिमास का योग बना था

मलमास में क्या करना चाहिए

यह व्रत करने वाले को भूमि पर सोना चाहिए। एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए। भगवान पुरुषोत्तम यानी श्रीकृष्ण या विष्णु भगवान का श्रद्धापूर्वक पूजन, मंत्र-जाप और हवन करना चाहिए। हरिवंश पुराण, श्रीमद् भागवत, रामायण, विष्णु स्तोत्र और रुद्राभिषेक के पाठ का अध्ययन व श्रवण करना चाहिए। अधिक मास की समाप्ति पर स्नान, दान व जप का अत्यधिक महत्व है। व्रत का उद्यापन कर ब्राह्मणों को भोजन कर श्रद्धानुसार दान भी करना चाहिए।

पूजा करें : जिस दिन मलमास शुरू हो रहा हो, उस दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान सूर्य नारायण को पुष्प, चंदन, अक्षत व मिश्रित जल से अर्घ्य देकर पूजन करें।

यज्ञ करें : पूरे मास व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत पुराण व ग्रंथों का अध्ययन विष्णु यज्ञ करें। पूर्व में प्रारंभ कार्य इस मास में किया जा सकता है।

जप करें : इस मास में मृत व्यक्ति का प्रथम श्राद्ध किया जा सकता है। रोग आदि की निवृत्ति के लिए महामृत्युंजय और रूद्र जपादि हो सकते हैं।

दान दें : अधिक मास में शुद्ध घी के मालपुए बनाकर प्रतिदिन कांसे के बर्तन में रखकर फल, वस्त्र व दक्षिणा अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करें।

संस्कार करें : इस मास में दुर्लभ योगों का प्रयोग, संतान जन्म के कृत्य, पितृ श्राद्ध, गर्भाधान व पुंसवन सीमंत संस्कार किए जा सकते हैं।

ये कार्य नहीं करें

कुछ नित्य कर्म, कुछ नैमित्तिक कर्म और कुछ काम्य कर्मों विवाह, मुंडन, नव वधु प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार, नए वस्त्रों को धारण करना, नए वाहन की खरीद और बच्चे का नामकरण संस्कार निषिद्ध है।

10 साल बाद योग

आचार्य पंडित श्याम सुंदर भारद्वाज के अनुसार, विशेष बात यह है कि दो ज्येष्ठ वाले अधिक मास का योग 10 साल बाद आया है। इसके पहले 2007 में ज्येष्ठ में अधिक मास का योग बना था।

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