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सिटी बसों के लिए नहीं मिल रहा ऑपरेटर, निगम ने छठी बार निकाला टेंडर, इस बार सिक्यूरिटी मनी भी कम की

3 वर्ष पहले
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राजधानी में सिटी बस चलाना निगम के लिए सिर दर्द बन गया है। सिटी बस के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए पांच बार टेंडर निकालने के बाद एक भी ऑपरेटर आगे नहीं आया। इसे देखते हुए गुरुवार को निगम ने फिर छठी बार टेंडर निकाला है। इसमें सिक्यूरिटी मनी भी कम दी गई है, ताकि ऑपरेटर दिलचस्पी लें।

इधर, वर्तमान में शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम ड्राइवर के भरोसे चल रहा है। हर दिन नगर निगम को सिटी बसों के लिए ड्राइवर खोजने पड़ते हैं। जिस दिन ड्राइवर नहीं मिलता, सिटी बसें नहीं चलती हैं। इससे लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। कहीं आने-जाने के लिए ऑटो और ई-रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है।

कवायद

बेपटरी चल रहा राजधानी का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, ऑटो और ई-रिक्शा पर लोगों की निर्भरता अधिक

वजहों से नहीं आ रहे ऑपरेटर

नगर निगम 26 नई बसों के साथ 40 पुरानी सिटी बसों को चलाने और मेंटेनेंस का टेंडर कर रहा है। यानी ऑपरेटर को नई बसों के साथ कंडम बसों का भी परिचालन करना होगा। इसके लिए कोई ऑपरेटर तैयार नहीं हो रहा है।

शहर में बस स्टॉपेज और रूट तय नहीं होने से ऑपरेटर पीछे हट रहे हैं, क्योंकि 26 नई बसें निगम की शर्तों के अनुसार चलानी होंगी। जिस रूट में मुनाफा नहीं है, वहां भी बस चलाने के लिए बाध्य होना होगा।

सिटी बसें चलाने की जिम्मेदारी नगर निगम दे तो रहा है, लेकिन बस खड़ी करने के लिए न तो गैराज है और न ही कोई स्थान देने की बात कही जा रही है।

इस बार शर्तों में दी गई छूट

इंदौर में कूड़े से गैस बनाकर चलाई जाएंगी बसें

रांची में एक दशक से सिटी बसों को चलाने के दर्जनों प्रयोग किए जा चुके हैं, लेकिन आज तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका। वहीं देश के सबसे स्वच्छ शहर का दूसरी बार खिताब लेने वाले इंदौर में सिटी बसों को लेकर नया प्रयोग होने जा रहा है। शहर से निकलने वाले कूड़ा-कचरे से मिथेन गैस बनाकर बसें चलाई जाएंगी। इसका ट्रायल भी सफल रहा है। ऐसे शहरों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का संचालन समझने की जरूरत है।

सिटी बस संचालन के लिए निगम ने अपनी शर्तों में काफी छूट दे दी है। पहले ऑपरेटर के पास 10 बसें चलाने का अनुभव होना जरूरी था, लेकिन अब 5 बसें ही चलाने की शर्त रखी गई है। पहले प्रति बस 75 हजार रुपए सिक्यूरिटी मनी निर्धारित की गई थी, अब घटा कर 50 हजार रुपए प्रति बस कर दी गई है।

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