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36 फीसदी सीटों को रिजर्व रखे बगैर प्रोन्नति दे राज्य सरकार

3 वर्ष पहले
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राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने राज्य सरकार से 36 फीसदी सीटों को रिजर्व रखे बगैर सौ फीसदी रिक्ति पर मूल मेधा सूची या वरीयता सूची से प्रोन्नति देने का आग्रह किया है। कहा है कि इससे वरीयता के अनुसार अनारक्षित, असटी, एसी के पदाधिकारियों को प्रोन्नति मिल सकेगी। अधिकारियों का एक शिष्टमंडल ने शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव( कार्मिक) केके खंडेलवाल को एक पत्र भी दिया है। उसमें कहा गया है कि अमरेंद्र कुमार सिंह बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य में उच्च न्यायालय के फैसले के तहत प्रोन्नति को तत्काल स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। अब कार्मिक विभाग द्वारा जो 36 फीसदी रिक्तियों को स्थगित रखते हुए 64 फीसदी रिक्तियों पर मेधा सूची (सिविल लिस्ट) से प्रोन्नति देने का निर्णय लिया जा रहा है, वह उचित नहीं है।

अधिकारियों का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में प्रस्तावित आरक्षण 50 फीसदी से अधिक नहीं होगा। यह आरक्षण पद आधारित होगा तथा एक बार रोस्टर चक्र पूर्ण होने पर पद प्रतिस्थापन का स्वरूपण ग्रहण करेगा। कहा गया है कि सरकार 36 फीसदी सीटें रिजर्व रख कर 64 फीसदी पदों पर मूल मेधा सूची से वरीयता के आधार पर सभी वर्गों को प्रोन्नति देती है तो अनारक्षित रोस्टर प्वांइट पर भी एसटी एवं एससी के पदाधिकारी प्रोन्नत होंगे। 36 फीसदी रिजर्व एवं स्थगित सीटों पर एसटी-एससी को भविष्य में प्रोन्नत किए जाने पर वे अपनी रोस्टर के अनुसार प्रोन्नत होंगे। इस प्रकार दोनों प्रोन्नति (64 एवं 36 फीसदी) में एसटी एवं एससी अपने रोस्टर प्वाइंट से अधिक सीटों पर काबिज होंगे। यह सिलसिला प्रत्येक प्रोन्नति में चलने से ऐसी स्थिति आ जाएगी कि अनारक्षित के लिए निर्धारित रोस्टर प्वाइंट अधिकांश एसटी व एससी के पदाधिकारी अा जाएंगे। फिर भविष्य में अगर 36 फीसदी रिजर्व सीट पर आरक्षण देते हुए प्रोन्नति देने का निर्णय होता है तो 64 फीसदी सीटों पर अनारक्षित रोस्टर पर प्रोन्नति पाए एसटी-एससी के पदाधिकारियों को उनके रोस्टर प्वाइंट पर कैसे स्थानांतरित किया जा सकेगा।

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