नगर निकायों के हाल में संपन्न चुनाव के बाद आदित्यपुर नगर निगम के मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव के चुनाव को चुनौती दी गयी है। इसके अलावा आदित्यपुर नगर निगम और रांची नगर निगम के अलग-अलग दो पार्षदों के निर्वाचन को भी चुनौती दी गयी है। आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 27 के निर्विरोध निर्वाचित पार्षद पांडी मुखी के निर्वाचन पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी संज्ञान लिया है और राज्य सरकार को इसकी जांच कर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इधर राज्य निर्वाचन आयोग ने मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव और रांची नगर निगम के वार्ड 39 पार्षद वेद प्रकाश सिंह के निर्वाचन के विरुद्ध दायर परिवाद पत्र को नगर विकास एवं आवास विभाग को निर्णय के लिए अग्रसारित कर दिया है। इसके बाद नगर विकास विभाग भी परिवाद पत्रों पर सुनवाई को लेकर उलझ गया है।
गलत शपथ देकर निर्वाचित होने का आरोप : मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव, पार्षद पांडी मुखी और वेद प्रकाश सिंह के निर्वाचन को चुनौती दिये जाने का आधार गलत शपथ पत्र बताया गया है। अलग अलग व्यक्तियों द्वारा परिवाद पत्र के माध्यम से दी गयी चुनौती में कहा गया है कि इन जनप्रतिनिधियों ने अपने शपथ पत्र में गलत जानकारी दी है। किसी ने दो वाहन होने के बाद एक वाहन होने तो किसी ने प|ी के नाम खरीदी गयी जमीन की जानकारी ही नहीं दी। खरीदी गयी संपत्ति को भी छुपाया गया।
सुनवाई करने में फंस रहा नगर विकास विभाग : नगर निकाय के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध दायर चुनाव याचिका की सुनवाई का अधिकारी राज्य निर्वाचन आयोग को दिया गया था। पिछले वर्ष संबंधित एक्ट में संशोधन कर दिया गया। संशोधन के बाद यह अधिकारी नगर विकास एवं आवास विभाग को हस्तांतरित हो गया है। हां उसमें यह बात भी सन्निहित है कि विभाग अंतिम फैसला से पहले राज्य निर्वाचन आयोग से मंतव्य लेगा।
अगर आयोग 15 दिनों के भीतर अपना मंतव्य नहीं देता है तो विभाग अंतिम निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा। लेकिन यहां सवाल यह खड़ा हो रहा है कि विभाग को किसी निर्वचन जनप्रतिनिधि के विरुद्ध फैसला करने के लिए न्यायिक शक्ति प्राप्त है। इसको लेकर सरकार के शीर्ष स्तर पर असमंजस की स्थिति बन आयी है। हालांकि नगरपालिका अधिनियम की धारा 680 में कोई भी व्यक्ति मुंसिफ कोर्ट में भी चुनाव याचिका दायर कर सकता है। इसके लिए निर्वाचन की तिथि से 30 दिनों के भीतर याचिका दायर करना जरूरी है। यहां 20 अप्रैल को राज्य के नगर निकायों के चुनाव परिणाम घोषित किए गए थे।