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बाहर पढ़ रहे एससी, एसटी व ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार ने झारखंड अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ी जाति प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति नियमावली 2018 को शिथिल कर दिया है। फरवरी 2018 में निर्गत इस नियमावली के तहत राज्य के बाहर समूह तीन व चार के पाठ्यक्रमों (पॉलिटेक्निक, बीए, एमए, बीएड, एमएड व इस तरह के अन्य पाठ्यक्रम) में अध्ययन कर रहे छात्रों की छात्रवृत्ति पर रोक लगा दी गयी थी। तर्क दिया गया था कि अब राज्य में शिक्षा के अवसर बढ़ रहे हैं। इस तरह के शिक्षण संस्थाओं में सीटों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन इससे परेशानी यह सामने आयी कि इस नियमावली के लागू होने से पूर्व राज्य के बाहर नामांकन करा चुके छात्रों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगी। वित्तीय वर्ष 2017-18 में ऐसे छात्रों की छात्रवृत्ति का नवीकरण भी करना था, जो लागू नियमावली के तहत नहीं हो पा रहा था। यह निर्णय मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया जिसकी जानकारी विभागीय प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे ने दी। छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के तहत अपुनरीक्षित वेतन ले रहे राज्यकर्मियों के महंगाई भत्ते में एक जनवरी 2018 से तीन फीसदी की बढोत्तरी की गयी है।

पांच एकड़ तक जल क्षेत्र वाले एक हजार सरकारी और एक हजार निजी तालाबों का पुनरुद्धार किया जाना है। सार्वजनिक उपयोग किये जानेवाले 75 फीसदी तालाबों के पुनरुद्धार की अनुशंसा विधायकों को और 25 फीसदी की डीसी को करनी है। अब 22 मई तक विधायकों की अनुशंसा नहीं किये जाने पर यह अधिकार डीसी को हस्तांतरित कर दिया है। अन्य फैसलों में रिम्स के राजकीय पारा मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न तरह के 21 पदों का सृजन, नगड़ी के मुड़मा मौजा में एचइसी से प्राप्त 4.05 एकड़ जमीन को गेल इंडिया को क्षेत्रीय कार्यालय बनाने के लिए हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है।

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