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टैब खरीदने में दिखायी फुर्ती, बांटने में फुस्स हो गई स्कूली शिक्षा विभाग की तेजी
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वर्ष 2017 में शिक्षकों के लिए टैब खरीदने में जो फुर्ती दिखायी, वह फुर्ती शिक्षकों को टैब बांटने में फुस्स हो गई। 19 जनवरी 2017 को सीएम रघुवर दास ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को टैबलेट देने की घोषणा क्या की, विभाग रेस हो गया। शिक्षकों को ई-विद्यावाहिनी सॉफ्टवेयर से जोड़ने और छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के हवाला देते हुए करीब चार महीने के भीतर ही जैप आईटी के माध्यम से टैब की खरीद कर ली गई। जुलाई 17 तक करीब 41 हजार टैब की आपूर्ति भी हो गई, इनमें से अधिकतर टैब अभी विभिन्न जिलों के डीएसई ऑफिस के गोदामों में पड़े हैं। विभाग ने सप्लायर को पैसे नहीं दिए, ऐसे में सप्लायर भी टैब को अनलॉक नहीं किया। ऐसे स्कूल जहां 100 से कम बच्चे हैं, वहां एक शिक्षक को टैब और ऐसे स्कूल जहां 100 से ज्यादा बच्चे हैं, वहां दो शिक्षकों को टैब बांटे जाने पर सहमति बनी थी। जितनी तेजी टैब की खरीदारी में दिखायी गयी, उसकी आधी सजगता भी योजना शुरू करने में दिखायी गई होती तो आज विभाग से ही स्कूलों की मॉनिटरिंग हो रही होती। जैप आईटी के सीईओ सर्वेश सिंघल ने बताया कि सप्लायर को अभी पेमेंट नहीं किया गया है, इसीलिए विलंब हो रहा है।
क्या है विद्या वाहिनी योजना
विद्या वाहिनी योजना के तहत छात्रों का नामांकन, उपस्थिति और विद्यालय छोड़ने, एमडीएम और शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखने के लिए वास्तविक समय आंकड़ा बनाने की जरूरत समझी गयी। ये आंकड़ा एक सॉफ्टवेयर के जरिए बनाया जाना था, जिसे विद्या वाहिनी का नाम दिया गया है। इस टैब में लगे विद्या वाहिनी सॉफ्टवेयर में क्लास इंस्पेक्शन, स्कूल इंस्पेक्शन, शिक्षकों-बच्चों की उपस्थिति दर्ज करनी है और एमडीएम का हाल अपडेट करना है। वैसे, जिस तरीके से इस एैप को डेवलप किया गया है, उसके अनुसार टीचर के अटेंडेंस के बारे में सिर्फ यह अपडेट किया जा सकता है कि कितने टीचर स्कूल आए हैं। जो अनुपस्थित हैं उनकी जानकारी अपडेट करने की सुविधा नहीं है। एमडीएम चलने की सूचना हां या ना में दी जा सकती है, पर, एमडीएम नहीं चलने के पीछे की वजह क्या है, इसकी जानकारी अपडेट करने की सुविधा नहीं है।
सचिव एपी सिंह बोले- तकनीकी भूल के कारण पैसे की निकासी नहीं हो पायी : विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कैबिनेट से पास होने के बाद कतिपय तकनीकी भूल के कारण पैसे की निकासी नहीं हो पायी। अब फिर से मंत्रिमंडल को नया प्रस्ताव भेजा जा रहा है। उसमें कई और खर्च बढ़ेंगे। नया प्रस्ताव करीब 70 करोड़ का है। शिक्षा मंत्री की स्वीकृति मिलते ही इसे कैबिनेट को भेज दिया जाएगा। ज्ञानोदय योजना का अंग विद्यावाहिनी के सॉफ्टवेयर को चलाने के लिए जैप आईटी के माध्यम से टैब की आपूर्ति हुई। एक टैब की कीमत 13,504 रुपए थी। 41,000 टैब की खरीदारी जैप आईटी ने की, जिसमें कुल 56 करोड़ खर्च होने थे। अब विभाग में इसके लिए एक अलग से सेल बनाया जाएगा।