रांची-मुरी रेलखंड पर अनमैंड क्राॅसिंग पर रेलवे ने 7 घंटे में रांची रेल मंडल का सबसे बड़ा लो हाईट सबवे बना डाला। इसमें 300 मजदूरों को लगाया गया था। समय की घड़ी जिस गति से बढ़ रही थी, उससे भी तेज गति से लो हाईट सबवे बनाने का काम किया गया। सुबह 9:10 बजे यह काम शुरू हुआ और दोपहर 3:10 बजे इसे पूरा कर लेना था, लेकिन इस कार्य को पूरा करने में 2 घंटे 20 मिनट ज्यादा लग गया। शाम 5:30 बजे एलएचएस बनाने का काम को पूरा करने के लिए रेलवे की इंजीनियरिंग विभाग ने ट्रेन चलाने की अनुमति दी। दैनिक भास्कर की टीम ने कम समय में सबसे बड़े एलएचएस बनाने के काम को नजदीक से देखा। मौके पर दो घंटे समय बीताने के बाद यह पता चला कि 300 मजदूर के साथ-साथ रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की पूरी टीम के साथ इलेक्ट्रिकल विभाग कम समय में बेहतर काम करने का पूरा टाइम मैनेजमेंट किया था। वहां मौजूद टीम में हर व्यक्ति को उनके कार्य के बारे में पता था कि किसे कौन सा काम कब करना है। इसलिए, कम समय में 2.15 करोड़ का प्रोजेक्ट को 7 घंटे में पूरा कर दिया।
दो बड़े क्रेन, पॉकलेन सहित कई मशीनरीज थी, जिससे काम किया गया : दो साइड में दो बड़े क्रेन से एलएचएस के ढाचेगत पीलर को उठाने का काम किया गया। वहीं, पॉकलेन से गिट्टी और पत्थर डालने का काम किया गया और मिट्टी खोदने के लिए कई जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया।
रांची रेल मंडल का सबसे बड़ा लो हाईट सब-वे बनाने के लिए पटरी को हटाने में लगे रेलवे कर्मी।
5 व 9 पीलर का एलएचएस बनाया गया था, इस बार 12 पीलर का एलएचएस बनाया गया
अभी तक रांची रेल डिविजन में 5 और 9 पीलर का एलएचएस बनाया गया, जिसमें दो से तीन घंटे का समय लगता था। लेकिन, इस बार सबसे बड़ा एलएचएस बनाया गया, जिसमें पहले से तैयार 12 पीलर के ढ़ाचा को क्रेेन से उठाकर सेट किया गया। इस कार्य की पूरी मॉनिटरिंग एडीआरएम अजीत सिंह यादव ने किया। इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर डीईएन को-ऑर्डिनेशन विशाल आनंद के डायरेक्शन में काम तेजी से हो रहे थे। इस मौके पर कई इंजीनियर मौजूद थे।
कम समय में काम का दबाव ज्यादा, रिस्क भरपूर रहता है : एडीआरएम
एडीआरएम अजीत सिंह यादव ने कहा कि मेन लाइन में ट्रेनों को रोककर इतना बड़ा काम करने के लिए जिगर चाहिए। क्योंकि, इस काम में रिस्क ज्यादा है। हल्की सी चूक बड़ी दुघर्टना को आमंत्रण दे सकती है। क्योंकि, काम बड़ा होता है और जल्दी-जल्दी से करना होता है। इसलिए, इस काम में सेफ्टी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। सेफ्टी विभाग के अधिकारी केवल सेफ्टी पर ही ध्यान देते है।