भागवताचार्य संत मनीष ने कहा िक भागवत के अनुसार जब कोई भक्तियोग में रमता है, तो उस पर ईश्वरीय कृपा होती है। वह एक अच्छा इंसान बनता है और इससे अपना ही नहीं, बल्कि अपने साथ साथ अपने परिवार, घर, समाज और देश को भी बेहतर स्थिति में ले आते हैं। संत शनिवार को अयोध्यापुरी चुटिया के वृंदावनधाम में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने वामन अवतार और भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर चर्चा करते हुए कहा कि उक्त दोनों प्रसंग व दृष्टांत से श्रीमद्भागवत एक सामान्य व्यक्ति को भक्तियोग में बढ़ने को प्रेरित करता है। कहा कि आप डाॅक्टर बने, इंजीनियर बने, अधिकारी बने या अन्य कुछ भी, पर जब तक आप अच्छे इंसान नहीं बनेंगे, आप बेहतर सेवा नहीं दे पाएंगे। अच्छा इंसान बनने के लिए जरूरी है कि खुद में भक्तिभाव को प्रस्फुटित करें। भगवान से प्रेम करना सीखे। जब आप प्रेम करेंगे, तभी भक्ति का आनन्द प्राप्त करेंगे। कहा कि प्रभु वो सुखी रोटी है, उसे घी में लगाकर खाइये। आनंद आएगा। ऐसी होती हैं भाव और ऐसी होती है भक्ति तब जाकर भगवान की प्राप्ति होती है।
श्रीराम की एक-एक गाथा हमारे लिए एक महत्वपूर्ण सीख है : पंडित शिवम
श्याम मंदिर में प्रवचन करते पंडित शिवम विष्णु पाठक।
बूंद-बूंद पानी का करें इस्तेमाल फिजूल नहीं करें बर्बाद : आचार्य
रांची | पिस्का मोड़ हेसल स्थित आनंदमार्ग जागृति अाश्रम में शनिवार से चार दिवसीय कार्यक्रम शुरू हुआ। आयोजन प्रॉउटिस्ट यूनिवर्सल ने किया है। पहले दिन उपयोगिता प्रशिक्षण शिविर में दिल्ली से आए आचार्य प्रियतोषानंद ने जलसंकट पर अपनी बात रखते हुए उसके निदान के उपाय बताए। कहा कि हमें पानी का बूंद-बूंद इस्तेमाल करना चाहिए। इससे फिजूल बर्बादी नहीं होगी। जलसंकट आने वाले समय में और गहराएगा। यदि अभी से हम नहीं चेते, तो जिंदगी जीने के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। हमें पेड़ अौर पौधे लगाने चाहिए। उन्होंने वाटर हार्वेस्टिंग पर बल दिया। पटना के आचार्य परमानंद ने समाज में बढ़ती जा रही आर्थिक असमानता पर अपने विचार रखे। आचार्य रणधीरदेव ने कहा कि नैतिक अवमूल्यन का दौर है।
रांची | प्रभु श्रीराम तो आदर्श हैं। इनकी एक-एक गाथा जीवन के लिए उपयोगी और एक महत्वपूर्ण सीख है। उन्होंने अपने हर कार्य से हम सबों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया है। ये बातें कोलकाता से पधारे श्रीकृष्णानुरागी पंडित शिवम विष्णु पाठक ने कहीं। श्री श्याम मंदिर हरमू में पुण्यतम अधिमास पर 16 -21 मई तक आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन के प्रवचन में कही। भागवत कथा प्रसंग में सर्वप्रथम श्रीराम के सूर्यवंश का वर्णन करते हुए सूर्यवंश को वीरों की गाथा सुनाई। पंडित शिवम ने चंद्रवंश का विस्तार से वर्णन किया। श्रीमद् भागवत कथा में श्री कृष्ण जन्मोत्सव व श्रीराम जन्मोत्सव की कथा का वर्णन जीवंत झांकी से कराया गया। पंडित शिवम विष्णु की कथावाचन शैली और भजन गायन से भक्तिरस में डूबे धर्मप्रेमी श्रद्धालु दोनों प्रसंगों का आनंद लिया। श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम प्रसंग में प्रभु श्री बालकृष्ण के प्रादुर्भाव की जानकारी दी। सभी ने प्रभु बालकृष्ण संग झूमा-नाचा। उनके चरणंरज लेने को आतुर रहे उनकी नजरें उतारी।
गीता एक विज्ञान होने के साथ एक तर्कशास्त्र और विचार प्रधान ग्रंथ है : स्वामी माधवानंद
रांची | श्रीमद् भगवद् गीता एक विज्ञान होने के साथ एक तर्कशास्त्र और विचार प्रधान ग्रंथ है, जिसमें प्रत्येक सिद्धांत व विचार भगवान के द्वारा प्रकट किया गया है। उक्त बातें चिन्मय मिशन के आचार्य स्वामी माधवानंद महाराज ने कही। वे शनिवार को एमजी रोड स्थित श्रीश्री मां आनंदमयी आश्रम में 15-19 तक आयोजित श्रीमद् भगवत गीता के अंतिम दिन अपने प्रचवन में कही। उन्होंने भगवान की व्याख्या को आगे बढ़ाते हुए यह सवाल रखा कि अगर श्रोता आत्मा के बारे न समझ पाए तो इसमें गलती श्रोता की नहीं, बल्कि वक्ता के समझाने की प्रक्रिया की है। इस प्रसंग में भगवान उत्तर देते हैं कि आत्मा के बारे समझना और समझाना कठिन है, क्योंकि आत्मा दुर्गेह है। साधारण व्यक्ति आत्मा को नहीं जान सकता है। इसी तरह भगवान अनेक तर्क और सिद्धांत के माध्यम से बताते हैं कि आत्मा अभेद्य है और नित्य है। इस पर किसी को शोक नहीं करना चाहिए। स्वामी माधवानंद ने कहा कि भगवान अर्जुन को कहते हैं कि तुम एक क्षत्रिय हो। क्षत्रिय धर्म की दृष्टि से तुम्हारा युद्ध से पलायन करना अनुचित है।