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शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़े हजारों लोग

3 वर्ष पहले
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शहीद के अंतिम दर्शन के लिए गिरिडीह से पालगंज तक लोग फूल और तिरंगा लेकर कतार में खड़े थे। पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से फायरिंग में शहीद हुए थे

तिरंगे में लिपटा आया शहीद सीताराम का पार्थिव शरीर

भास्कर न्यूज | गिरिडीह/पीरटांड़/रांची

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में शहीद गिरिडीह के बीएसएफ जवान सीताराम उपाध्याय का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर शनिवार को पैतृक गांव पालगंज पहुंचा। उनकी एक झलक पाने के लिए गिरिडीह सीमा से पालगंज मोड़ तक घंटों पहले से लोग तिरंगा और फूल लेकर कतारबद्ध खड़े थे। हर आंखों में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा था। उनका कहना था कि पाकिस्तान ने चोरी-छिपे हमा कर कायरता का परिचय दिया है। उससे बदला लेना ही चाहिए। यही शहीद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही सबकी आंखें नम हो गईं। बुजुर्ग मां और दिव्यांग पिता के अांसू रुक नहीं रहे थे। प|ी रेशमा उपाध्याय पति के शरीर से लिपटकर दहाड़ें मारकर रो रही थीं। दोनोें छोटे-छोटे बच्चे भी पिता से लिपटे हुए थे। गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद शाम में यहां से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। इसमें हजारों महिलाओं सहित करीब 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। हर तरफ पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी हो रही थी। देर शाम उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

प|ी बोलीं-सरकार नौकरी दे, ताकि बच्चों काे ठीक ढंग से पढ़ा सकूं

एयरपोर्ट पर शहीद की प|ी रेशमा उपाध्याय, तीन साल की बेटी सिद्धि और दो साल के बेटे कन्हैया के साथ मौजूद थे। प|ी बेसुध थीं। लेकिन फक्र भी था कि पति ने देश के लिए जान दी। रेशमा ने कहा- मुआवजे से बच्चों का पालन-पोषण नहीं हो सकेगा। इससे जीवन-यापन नहीं चलेगा। सरकार नौकरी दे ताकि दोनों बच्चों को पढ़ा-लिखा सकें। उनकी ठीक ढंग से परवरिश कर सकें। उनकी जिंदगी के लिए सरकार को कम से कम इतना तो सोचना ही चाहिए। उनके साथ शहीद के चाचा राजेश कुमार उपाध्याय, बड़ा भाई साेनू उपाध्याय, संजीव उपाध्याय, चाची विनीता उपाध्याय भी मौजूद थे।

दोपहर 12:50 बजे रांची पहुंचा पार्थिव शरीर

शहीद का पार्थिव शरीर एयर इंडिया के विमान से दोपहर 12:50 बजे रांची एयरपोर्ट पहुंचा। बीएसएफ के अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। यहां से सड़क मार्ग से पार्थिव शरीर गांव ले जाया गया।

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