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हर तरह की व्यथा को दूर करता है श्रीमद् भागवत कथा : संत मनीष

3 वर्ष पहले
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महाराष्ट्र (चंद्रपुर) के भागवताचार्य संतश्री मनीष भाई महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ हो या अन्य कोई भी सत्संग, जीवन के सफर में मिलने वाली परेशानियों व चुनौतियों से इंसान को आत्मिक सुकून देता है। समस्याओं व चुनौतियों से संघर्ष करने का सामर्थ्य प्रदान करता है। कहा कि भागवत कथा मनुष्य की शारीरिक व मानसिक व्यथा दूर करती है। इसका मुख्य कारण भक्तियोग है। भक्ति योग से भगवान की प्राप्ति होती है। हरि की प्राप्ति में ही जीवन के सारे सुख समाहित हैं। संतश्री मनीष भाई बुधवार को अयोध्यापुरी चुटिया की ओर से एलए गार्डेन हाई स्कूल के सामने वृंदावनधाम में बुधवार को श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान अपने प्रवचन में कही।

भागवत सेवा समिति अयोध्यापुरी चुटिया द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भक्तों व श्रद्धालुओं को हरि की चाहत में बढ़ने और सत्संग करने को प्रेरित किया। कहा कि हरि की चाहत में परम सुख की प्राप्ति है। भगवान को चाहने पर इंसान स्वत: सब कुछ पा लेता है। उन्होंने कहा कि हरि की प्राप्ति तभी संभव है, मनुष्य मन की गहराई से ईश्वर का हो जाए। इसके लिए सप्ताह के सात दिन में हर दिन अपने जीवन के व्यस्त दिनचर्या से हरि के लिए समय निकालने पर जोर दिया।

कथा सुनाते संतश्री मनीष भाई महाराज।

श्री श्याम मंदिर में भक्तों ने सुनी कथा

रांची | हरमू रोड श्री श्याम मंदिर में बुधवार से श्री कृष्णानुरागी पंडित शिवम विष्णु पाठक के सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा शुरू हुई। पहले पूजन और फिर आरती हुई। पंडित शिवम विष्णु पाठक ने कथा के पहले दिन भागवत कथा में वर्णित श्लोकों का गायनकर प्रसंगों का विस्तार से व्याख्या की। श्री श्याम मित्र मंडल के हरि प्रसाद पेडीवाल, कृष्ण अग्रवाल, सुरेश सरावगी, मंजू मुरारका और रोशनी मुरारका ने भी श्रीमद् भागवत कथामृत पान किया। महामंत्री आनंद शर्मा के अनुसार, दूसरे दिन गुरुवार को ध्रुव चरित्र तक कथा का वाचन होगा।

आनंदमयी आश्रम में सांख्य योग पर प्रवचन

रांची | चिन्मय मिशन आश्रम रांची, एमजी रोड का श्री आनंदमयी आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। द्वितीय अध्याय सांख्य योग विषय पर बुधवार को प्रवचन हुआ। स्वामी माधवानंद ने कहा कि गीता सुगीता करने योग्य है। उन्होंने इसके वचनों को स्वयं श्री पद्मनाभविष्णु भगवान के मुखारबिंद से निकला हुआ बताया।

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