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साइबर फ्राॅड का दोषी अफ्रीकन रिहाई आदेश के 8 माह बाद जेल से छूटा, अब 6 दिन से कोतवाली थाने में कर रहा मुंबई वापसी का इंतजार

3 वर्ष पहले
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बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार से तीन साल की सजा काट कर जेल से रिहा घाना (अफ्रीका) निवासी एमानुएल ओनियेका ओकपारा को छह दिन बाद भी पुलिस मुंबई भेजने का इंतजाम नहीं कर सकी है। वह अभी कोतवाली थाने में है। जेल से छूटने के बाद जेल अधीक्षक ने एमानुएल को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी कोतवाली थाने को दे दी है। एमानुएल ने निराशा में आकर खाना भी छोड़ दिया है। वह थाने के हर पुलिसकर्मी से बस यही कह रहा है कि उसे किसी तरह मुंबई भेज दिया जाए। एमानुएल साइबर फ्रॉड के एक मामले में अगस्त-2014 से बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में था। उसकी रिहाई सितंबर 2017 में ही हो गई थी, लेकिन कागजी कार्रवाई होते होते वह 16 मई 2018 को जेल से छूटा।

थाने तो बन गए थे स्मार्ट, लेकिन कुर्सी-टेबल नहीं मिलने की वजह से हो रही थी परेशानी, कई थानो में बैठने की भी नहीं थी व्यवस्था

राजधानी के नौ स्मार्ट पुलिस थानों को तीन साल बाद मिल पाया फर्नीचर

सिटी रिपोर्टर | रांची

पुलिस मुख्यालय की ओर से राजधानी के नौ स्मार्ट थानों को तीन वर्ष के बाद फर्नीचर मिल गए। इनमें अरगोड़ा थाना, लोअर बाजार थाना, चुटिया थाना, लालपुर थाना, कांके थाना, जगन्नाथपुर थाना, नामकुम थाना, कोतवाली थाना और डोरंडा थाना शामिल हैं। कई थानों में फर्नीचर सजा भी दिए गए हैं।

इन स्मार्ट थानों में से सात तीन वर्ष पहले ही बन गए थे। सिर्फ कोतवाली और डोरंडा थाना भवन का निर्माण पिछले वर्ष हुआ है। सभी में पुराने और टूटे-फूटे फर्नीचर से ही काम चल रहा था। नए फर्नीचर मिलने से स्मार्ट थानों की रौनक बढ़ गई है।

थाने के हर पुलिसकर्मी से बस यही कह रहा है कि उसे किसी तरह मुंबई भेज दिया जाए

शहर के कई थाने ऐसे, जिनकी छतों से टपकता है पानी

शहर में अभी भी कई थाने ऐसे हैं, जिनका भवन इतना जर्जर हो गया है कि बारिश के दिनों में छतों से पानी टपकता है। हिंदपीढ़ी थाना और सुखदेव नगर थाना भवन की स्थिति काफी खराब है। डेली मार्केट थाने का भी भवन काफी पुराना हो गया है। बरियातू थाने की भी ऐसी ही स्थिति है।

कई पुलिस वाले बन गए हैं साथी

कोतवाली थाने में कई पुलिस वाले उसके साथी बन गए हैं। एमानुएल ने बताया कि घाना में उसके पिता बड़े पद पर हैं। उसकी प|ी और दो बच्चे घाना में ही रहते हैं। वह गार्मेंट का बिजनेस करने 2013 में भारत आया था। लेकिन उनके कुछ नाइजीरियन दोस्तों ने उसे फंसा दिया। उसके दोस्तों ने एक एटीएम से पैसे निकालने के लिए एटीएम कार्ड दिया था। वह नहीं जानता था कि जिस कार्ड से वह पैसे निकालने जा रहा है, वह दूसरे के एटीएम कार्ड का क्लोन है। इस मामले में ही वह पुलिस गिरफ्त में आया। उसके खिलाफ मुंबई में भी तीन साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हैं। उन मामलों में उसे बेल मिल चुकी है।

जेल में उसे अलग रखा जाता था

एमानुएल ने बताया कि जेल में उसे अलग रखा जाता था। विदेशी कैदियों के लिए अलग सेल बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में है। वहां तीन साल में कभी भी खाने-पीने की दिक्कत नहीं हुई। एक और विदेशी उसकी सेल में आया था, लेकिन वह काफी पहले ही जेल से रिहा हो गया।

फर्नीचर में हर थाने को ये मिले

स्टोर वेल (01), एस-टाइप चेयर (40), स्टील बेड कॉट (15), स्टील फ्रेम टेबल (12), विजिटर चेयर (09), सीआई-एसआई चेयर (01), वेटिंग सोफा (01), थानेदार के लिए टेबल-चेयर (01), थाना प्रभारी के चैंबर के लिए चेयर (06), थानेदार चैंबर के लिए साइड टेबल (01), रिसेप्शन ऑफिस चेयर (01), थानेदार के लिए ऑफिस चेयर (02), ऑफिसर के लिए चेयर (07), ऑफिसर के लिए सोफा (01), कंप्यूटर टेबल (03), वायरलेस रूम के लिए चेयर (03), टीवी रूम से लिए सोफा (01)।

थानों को मिलेगा वाटर कूलर कम प्यूरिफायर

पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी थानों में पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए वाटर कूलर कम प्यूरिफायर दिए जा रहे हैं। इसकी कीमत करीब दो लाख रुपए है। कंपनी को दो वर्ष तक मेंटेनेंस करना होगा। शहरी क्षेत्र में अधिकतर थानों में पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। इससे पुलिसकर्मियों और शिकायत दर्ज कराने वालों को काफी परेशानी होती है।

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