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पानी की कमी से ब्लड प्रेशर लो होने पर एक्यूट किडनी फेलियर

3 वर्ष पहले
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हेल्थ रिपोर्टर रांची



गर्मियों मंे पानी की कमी और ब्लड प्रेशर लो होने से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। किडनी कुछ समय के लिए काम करना बंद कर देती है। ऐसे स्थिति में, कुछ पेशेंट्स मेडिसिन से ठीक हो जाते हैं। वहीं, कुछ पेशेंट्स में एक्यूट किडनी फेलियर होने पर डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। हांलाकि,डायलिसिस को लेकर पेशेंट्स में कई तरह की धारणाएं हैं। उनका मानना है कि एक बार डायलिसिस शुरू होने पर बार-बार करवाना पड़ेगा। जबकि यह सही नहीं है। बीमारी की गंभीरता के आधार पर बार-बार डायलिसिस किया जाता है, अन्यथा नहीं। एक्यूट किडनी फेलियर में डायलिसिस से दोनों किडनी साधारण तरीके से काम करना शुरू कर देती हैं। पेशेंट सामान्य जिंदगी जी पाता है। ज्यादा उम्र, डायबिटीज और हार्ट डिजीज पेशेंट्स में एक्यूट किडनी फेलियर का रिस्क ज्यादा रहता है। रमजान में पानी नहीं पीने से यह प्रॉब्ल्म ज्यादा होती है। स्टोन प्रॉब्लम में पानी कम पीने से इसका साइज बढ़ता है।

वॉमिटिंग, लूज मोशन होने से ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, शॉर्ट पीरियड के लिए किडनी काम करना बंद कर देती है, यूरिन में इंफेक्शन की संभावना

खाली पेट भी ले सकते हैं बीपी की दवाइयां

खाना नहीं खाने से हाइपोग्लोसिमिया हो सकता है, इसमें ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल नहीं रह पाता है। साथ ही खाली पेट बीपी की दवाइयां नहीं ले सकते हैं। लोगों में यह भ्रम है कि इसी वजह से वे समय पर दवाइयां नहीं लेते हैं। िजसके चलते ब्लड प्रेशर घटता-बढ़ता रहता है। यह किडनी के फंक्शन को प्रभावित करता है। जबकि बीपी की दवाइयां भूखे पेट भी ली जा सकती हैं।

एक्यूट किडनी फेलियर के लक्षण

भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी और हिचकी आना, यूरिन कम आना या फिर बंद हो जाना, सूजन आना, सांस फूलना।

यूरिन में इंफेक्शन और पस आना भी किडनी फेलियर का रिस्क फैक्टर

ब्लड में यूरिया, क्रिएटिनिन और पोटैशियम का लेवल बढ़ने पर भी यह प्रॉब्लम हो सकती है। वहीं, यूरिन टैस्ट में इंफैक्शन, प्रोटीन और पस आने से भी इस बीमारी को डायग्नोस किया जा सकता है।

-डॉ. जेके मित्रा, प्रोफेसर मेडिसिन रिम्स, रांची

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