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देरी के कारण सिमडेगा के रामरेखा जलाशय योजना से विजेता कंस्ट्रक्शन को हटाया गया, फिर से काम होगा री-एसाईन

3 वर्ष पहले
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सिमडेगा के रामरेखा जलाशय योजना के कार्य से विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी को हटा दिया गया है। जलसंसाधन विभाग ने यह कारवाई की है। अब इस योजना के बाकी बचे काम का डीपीआर तैयार करके री-एसाईन किया जाएगा। काम पूरा करने में काफी देरी ही इसका कारण बना है। इससे पूर्व केशो जलाशय योजना में भी कंपनी पर काम से अधिक भुगतान लेने के मामले में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और एसीबी जांच चल ही है।

काम कम और अधिक भुगतान केशो जलाशय योजना में हो चुकी है कार्रवाई : कोडरमा में 67 करोड़ की लागत वाली केशो जलाशय परियोजना ढाई साल में पूरी होनी थी। 10 साल बीत गए और एक चौथाई काम भी नहीं हुआ। इस पर अब तक कुल 19 करोड़ रु. खर्च हो चुके हैं। इस बीच इंजीनियरों से साठगांठ कर ठेका कंपनी ने 44 करोड़ का भुगतान ले लिया है। काम तीन साल से बंद है। जांच में गड़बड़ी साबित होने के बाद जल संसाधन विभाग ने ठेका कंपनी विजेता कंस्ट्रक्शन और 13 इंजीनियरों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा की। इसके बाद मुख्यमंत्री की आदेश पर ठेका कंपनी समेत तत्कालीन दो कार्यपालक अभियंता, तीन सहायक अभियंता और आठ कनीय अभियंता को दोषी बताया और प्राथमिकी दर्ज किया गया था। अभी एसीबी जांच चल रही है।

इस योजना के लिए जल संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2006-07 में टेंडर निकाला था। तय शिड्यूल रेट से नौ फीसदी अधिक पर यह काम विजेता कंस्ट्रक्शन को मिला था। इसे ढाई साल में पूरा किया जाना था। बार-बार निर्देश के बावजूद जब काम पूरा नहीं हुआ। 19 करोड़ रुपए का ही काम हुआ है। लेकिन भुगतान 44 करोड़ से अधिक का हो गया। काम से 25 करोड़ रुपए अधिक भुगतान को जांच कमेटी ने गबन करार दिया था। इधर विभाग ने रामगढ़ के भैरवा जलाशय योजना पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। यह योजना भी काफी विलंब से चल रही है। दो स्थानों पर कारवाई होने के बाद अब भैरवा जलाशय योजना पर भी कारवाई तय मानी जा रही है।

देरी करना बना मामला

जलसंसाधन विभाग की यह योजना 2005-2006 की है। इस योजना को 2010 तक पूरा कर देना था, लेकिन अब वर्ष 2018 में अब इसके पूरा होने के कोई आसार नहीं देखते हुए यह कारवाई की गई है। यह योजना 53.87 करोड़ रुपए की है। विभाग के अनुसार इसका काम अब भी 20 प्रतिशत से अधिक है और इसके जल्द पूरा होने की प्रगति नहीं देखते हुए कंपनी को इस कार्य से हटाने का फैसला लिया गया।

काम में अधिक देरी को देखते हुए विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी को रामरेखा जलाशय योजना से हटाया गया है। बाकी बचे काम का नया डीपीआर बनाकर पुन: इसे री-एसाईन किया जाएगा। -गणेश राम, चीफ इंजीनियर जलसंसाधन विभाग

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