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साइबर फ्रांड केस में तीन साल रांची जेल में रह कर भोजपुरी सीख गया अफ्रीकी, रिहाई के बाद बोला- हम न रहब इहां
कस्टडी से निकल के कस्टडी में आ गइनी, अब हम न रहब इहां, आई वांट टू टॉक टू माई एडवोकेट। अफ्रीका के घाना के रहने वाले एमानुएल ओनियेका ओकपारा को अचानक भोजपुरी बोलते हुए देख सब लोग चौंक गए। ओनियेका पिछले तीन वर्षों से बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद था। बुधवार को उसकी जेल से रिहाई हुई। रिहाई के बाद उसे रांची पुलिस को तबतक के लिए सौंप दिया गया, जबतक उसे घाना भेजने के लिए दूतावास स्तर से कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती। जेल से निकलकर जब ओनियेका को कोतवाली पुलिस लेकर थाने पहुंची तो वह परेशान हो गया। वह भोजपुरी में बोलने लगा कि हम कस्टडी से निकलके कस्टडी में ही आ गईनी। इ बात ठीक नइखे। जब पुलिस ने उससे पूछा कि वह भोजपुरी कहा से सीखे तो उसने बताया कि जेल में रहते रहते उसने यह भाषा सीख ली।
घाना भेजने की कार्रवाई होने तक रांची पुलिस का मेहमान बना रहेगा फिरंगी, दूतावास स्तर पर कार्यवाही जारी
घाना के रहनेवाले एमानुएल ओनियेका वर्ष 2014 से जेल में बंद था, कई दिनों तक बेलर भी नहीं मिला
घाना का रहने वाला एमानुएल ओनियेका ओकपारा को वर्ष 2014 में सजा हुई थी। उसके बाद उसे अगस्त 2014 में बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में भेजा गया था। सितंबर 2017 में ही उसका तीन साल की सजा समाप्त हो गई थी। लेकिन बेलर नहीं मिलने की वजह से वह रिहा नहीं हो पा रहा था। बुधवार को जब वह रिहा हुआ तो उसे घाना भेजने के लिए एंबेसी (दूतावास) से संपर्क किया गया। लेकिन एंबेसी की कार्रवाई पूरी नहीं होने की वजह से उसे फिलहाल कोतवाली थाने में ही मेहमान की तरह रखा गया है।
एमानुएल को 3 साल की सजा और 10 हजार की फाइन लगी थी
घाना के रहने वाले ओकपारा ने साइबर फ्रॉड किया था। इसके बाद 2014 में उसे गिरफ्तार किया था। उसे तीन साल का कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई गई थी। जेल से रिहाई के बाद ओकपारा दिल्ली जाने के लिए लगातार प्रयास करता रहा। लेकिन गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश के अनुसार अब उसे उसके देश घाना भेजने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में रांची पुलिस का कहना है कि ऊपर से जैसा आदेश आएगा, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।