21 मई से शुरू होगा रिम्स में 99.42 लाख घोटाले मामले का स्पेशल ऑडिट
रिम्स प्रबंधन 99.42 लाख के कैश काउंटर घोटाले का स्पेशल ऑडिट कराने पर तैयार हो गया है। रिम्स निदेशक डॉ. आरके श्रीवास्तव ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने कहा कि रिम्स में लंबित स्पेशल ऑडिट के लिए कार्यालय में उपलब्ध बिल और वाउचर को व्यवस्थित कर उसकी कंप्यूटराइज्ड सूची तैयार की जा रही है, जो कि 20 मई तक पूरी हो जाएगी। कई रिफंड वाउचर संबंधित एजेंसी (इंफोटेक ) की ओर से मांगें जाने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। एजेंसी के खिलाफ बरियातू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। रिम्स में उपलब्ध बिल और वाउचर के आधार पर स्पेशल ऑडिट 21 मई से शुरू किया जा सकता है। रिम्स निदेशक का पत्र मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने उप महालेखाकार को स्पेशल ऑडिट प्रारंभ करने के लिए पत्र भेज दिया है। रिम्स के कैश काउंटर का संचालन कर रही कंपनी इंफोनेट लिंक प्रालि.पर 99.42 लाख रुपए की हेराफेरी के आरोप लगे हैं। एजी ने वर्ष 2012-13 के ऑडिट में 44.58 लाख की गड़बड़ी पकड़ी थी। अब एजी ने फिर से वर्ष 2013-14 के ऑडिट में 21.68 लाख की गड़बड़ी पकड़ी । इसके बाद वर्ष 2014-15 में 16.18 लाख और वर्ष 2015-16 में 16.98 लाख की गड़बड़ी पकड़ी गई। एजी ने सवाल उठाया था कि यहां करीब 99 लाख रुपए का हिसाब-किताब नहीं है।
कैश काउंटर के संचालन की जिम्मेवारी कंपनी को तत्कालीन रिम्स निदेशक द्वारा 12.1.2006 को दी गई थी। रिम्स में किसी भी मरीज (बीपीएल छोड़कर) को पैथोलॉजी या रेडियोलॉजी टेस्ट कराने के लिए कैश काउंटर से पर्ची कटानी पड़ती है।