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फिल्म की सिर्फ कहानी ही नहीं, उसमें लगी सैकडों लोगों

3 वर्ष पहले
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फिल्म की सिर्फ कहानी ही नहीं, उसमें लगी सैकडों लोगों की मेहनत भी समझें, यही बनाएगा अच्छा फिल्म मेकर

सिटी रिपोर्टर | रांची

फिल्म चाहे 10 मिनट की हो या 2.30 घंटे की, मेहनत बराबर मांगती है। कोई भी फिल्म सिर्फ एक कहानी ही नहीं, उसमें लगी सैकडों लोगों की मेहनत भी बयां करती है। फिल्मों में हर एक किरदार महत्वपूर्ण है। परदे पर दिखने वाले भी और परदे के पीछे वाले भी। प्रोड्यूसर से लेकर एक स्पॉट बॉय तक, हर स्तर पर काम की बारीकियां ही किसी फिल्म को अच्छा या बुरा बनाती हैं। अगर कोई फिल्म मेकर बनने के सपने देख रहा है, तो सबसे पहले इस बात को समझना जरूरी है। ये बातें रांची यूनिवर्सिटी में विभिन्न विभागों के पीजी स्टूडेंट्स को समझाई गईं। मौका था, फोटोग्राफी क्लब रूपसी द्वारा आयोजित फिल्म मेकिंग वर्कशॉप का। इसमें रजिस्ट्रेशन के जरिए 45 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया है।

यह दो दिनों का वर्कशॉप है। सोमवार को पहला दिन था। इसमें आरयू के स्टूडेंट्स वेलफेयर के प्रेसिडेंट डॉ. पीके वर्मा उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि जिस फिल्म निर्माण कला को सीखने के लिए लोग मुंबई, कोलकाता जाते हैं, लाखों रुपए खर्च करते हैं, वह कला आरयू में रूपसी के जरिए युवाओं को नि:शुल्क सिखाया जा रहा है। एक वेब न्यूज पोर्टल के सीईओ जगदीश सिंह अमृत ने स्टूडेंट्स को फोटोग्राफी और सिनेमेटोग्राफी की बारीकियां समझाई। कैमरा, कंपोजीशन, डेप्थ ऑफ फिल्ड, शॉट्स समेत सभी टेक्निकल पहलुओं की प्रैक्टिकल जानकारी दी।

आरयू में चल रहे फिल्म मेकिंग वर्कशॉप में स्टूडेंट्स को सिखाई गई फिल्म मेकिंग की बारीकियां

फिल्म मेकर बनना है, तो अभी ही मूवी हॉल से सीखना शुरू करें

डॉ. सुशील अंकन ने स्टूडेंट्स को फिल्म मेकिंग के लिए बेसिक आइडिया डेवलपमेंट, उसे स्टोरी में बदलना और उस स्टोरी का स्क्रीनप्ले तैयार करना सिखाया। डॉ. अंकन ने कहा, \\\'जो युवा फिल्म मेकर बनने की ख्वाहिश रखते हैं, उन्हें इसकी तैयारी अभी से मूवी हॉल से शुरू करनी चाहिए। आपकी पहली ट्रेनिंग ये फिल्में ही करेंगी। बशर्ते, सिर्फ कहानी के मजे लेने के बजाए शुरू से अंत तर फिल्मों के हर पहलू की बारीकियां समझने की कोशिश करें। फिल्म छोटी हो या बड़ी ग्रामर और तकनीक सब की एक जैसी होती है।\\\'

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