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दुमका कोषागार से निकासी मामले में 28 आरोपियों की सजा पर बहस पूरी

3 वर्ष पहले
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दुमका कोषागार से 34 करोड़ 91 लाख की अवैध निकासी के चारा घोटाला मामला आरसी 45 में दोषी पाए गए 35 आरोपियों में से 28 आरोपियों की सजा की बिंदू पर सुनवाई पूरी कर ली गई है। सीबीआई के स्पेशल जज शिवपाल सिंह की अदालत ने शुक्रवार को 7 आरोपियों प्रकाश लाल, राधा मोहन मंडल, रघुनंदन प्रसाद, राकेश अग्रवाल, रामअवतार शर्मा, रवि सिन्हा और राकेश गांधी उर्फ सुशील गांधी की सजा की बिंदू पर सुनवाई की गई। सभी आरोपियों की ओर से उनके वकीलों ने कोर्ट से अनुरोध किया कि सभी आरोपी पिछले 22 वर्षों से मुकदमे की सुनवाई में पूरा सहयोग किए हैं। अब ये लोग अनेकों रोगों से ग्रसित हो गए हैं। कमजोर हो गए हैं। उनकी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कम से कम सजा देने का और कम से कम जुर्माना लगाने का अनुरोध किया गया। मामले में बचे 9 आरोपियों की सजा की बिंदू पर सुनवाई 17 अप्रैल को होगी। सुनवाई पूरी होने के बाद ही कोर्ट सभी 37 आरोपियों को सजा सुनाएगी और जुर्माना लगाएगी। सभी आरोपी इस मामले में 9 अप्रैल को दोषी ठहराए गए। सजा की बिंदू पर सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों की वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था।

डोरंडा कोषागार से निकासी मामले में 3 गवाहों का बयान दर्ज
डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के चारा घोटाला मामला आरसी 47-1996 में सीबीआई की ओर से 3 गवाहों का बयान दर्ज कराया गया। सीबीआई ने टाइम्स ऑफ इंडिया के तत्कालीन फोटो जर्नलिस्ट कृष्ण मोहन शर्मा का बयान दर्ज कराया। गवाही देते हुए फोटो जर्नलिस्ट ने कोर्ट को बताया कि उस दौरान लालू के आवास पर होली मनाने से संबंधित उन्होंने एक तस्वीर ली थी, जिसमें आरोपी लालू प्रसाद, उनकी प|ी राबड़ी देवी और मामले में आरोपी तत्कालीन विधायक आरके राणा तीनों को एक साथ होली खेलते दिखाया गया है। फोटोग्राफर ने कोर्ट को यह भी बताया की होली खेलते हुए तीनों की तस्वीर टाइम्स ऑफ इंडिया के मुख्पृष्ठ पर छपी थी। साथ में समाचार भी बना था। फोटोग्राफर ने कोर्ट के समक्ष समाचार और तस्वीर को दाखिल किया। साथ ही कहा कि यह तस्वीर उनके द्वारा ही ली गई थी।

सीबीआई को जिन 8 वाहनों का विवरण दिया गया था उनमें एक रजिस्टर्ड नहीं था
इसके अलावा दो और गवाहों का बयान दर्ज हुआ, जिसमें पंजाब के खनन क्षेत्र के परिवहन पदाधिकारी संदीप सिंह ने कोर्ट को बताया कि उनके कार्यालय में सीबीआई द्वारा पत्र लिखकर वाहनों का विवरण मांगा गया था। उन्होंने गवाही देते हुए कोर्ट को बताया कि सीबीआई द्वारा मांगे जाने पर उनके कार्यालय से जिस 8 वाहनों का विवरण दिया गया था वे सभी वाहन दुपहिया थे। इसमें से एक वाहन रजिस्टर्ड भी नहीं था। इसके अलावा बिहार राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री सचिवालय के सहायक सुरेश चंद्र चौधरी ने कोर्ट को बताया कि उस दौरान मुख्यमंत्री के सचिवालय में व्यवहार में लाई जानेवाली प्राप्ति पंजी कार्यालय में रहती थी, जिसमें प्राप्त होनेवाले सभी दस्तावेज और पत्रों की इंट्री होती थी। उन्होंने कोर्ट के समक्ष प्राप्ति पंजी का सत्यापन किया। बाद में सीबीआई की ओर से पेश किए गए तीनों गवाहों का क्रॉस एग्जामिनेशन आरोपियों की ओर से किया गया। मामले की सुनवाई सीबीआई के स्पेशल जज प्रदीप कुमार की अदालत में हुई। इस दौरान आरोपियों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की गई।

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