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परीक्षक नहीं बनाया तो स्कूल कॉलेज बंद करने की चेतावनी

3 वर्ष पहले
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झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा की आपात बैठक शुक्रवार को हुई। इसमें मोर्चा ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव के पत्र, जो जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजी गई है, पर विशेष आपत्ति जताई। इसमें इंटर एवं मैट्रिक के स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त एवं अनुदानित शिक्षकों को परीक्षक नहीं बनाने एवं अप्रशिक्षित शिक्षकों की सूची अलग से भेजने के फरमान को तानाशाही और शिक्षकों को जलील करने वाला आदेश बताया। मोर्चा के नेताओं ने कहा कि अगर सरकार अपने निर्णय पर पुन: विचार नहीं करेगी, तो 22 अप्रैल को प्राचार्यों की बैठक में मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया जाएगा। साथ ही मोर्चा अपने आप को मूल्यांकन कार्य से अलग कर लेगा।

इसके अलावा स्कूल-कॉलेज अनिश्चतकालीन तक बंद रहेंगे। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित होने के लिए सरकार जिम्मेवार होगी। बैठक में मोर्चा के नेताओं में सुरेंद्र झा, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, मोहम्मद कादिर, अरविंद सिंह, विजय झा, नरेश घोष, सुखदेव महतो, राजू महतो, चंद्रशेखर, पीके सिंह, अशफाक आलम, अली अराफात, डीएम सिंह, नरोत्तम सिंह आदि उपस्थित थे।

कहा-परीक्षक नहीं बनाना जलील करने वाला निर्णय
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि जो शिक्षक विगत 25 वर्षों से पढ़ा रहे हैं और एकीकृत बिहार से वर्ष 1990 से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं, उन्हें अप्रशिक्षित के नाम पर परीक्षक नहीं बनाना दुर्भाग्यपूर्ण और जलील करने वाला निर्णय है। इसके अलावा 2005 के पूर्व नियुक्त शिक्षक बिहार नियमावली से नियुक्त हुए हैं, जिसमें बीएड की कोई शर्त नहीं थी। 2005 के बाद झारखंड प्रस्वीकृति नियमावली में बीएड की शर्त नवनियुक्त शिक्षकों के लिए है। अब इसके आधार पर मूल्यांकन कार्य से अलग करना गलत है।

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