पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • निर्भय क्रांतिवीर थे डाॅ. बाबा साहेब

निर्भय क्रांतिवीर थे डाॅ. बाबा साहेब

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बाबा साहेब डाॅ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर

रघुवर दास, मुख्यमंत्री

रांची | राष्ट्र और समाज के विषय में हमलोग भाग्यशाली हैं। हमारे पास हजारों वर्षों का इतिहास, संस्कृति और मानव सभ्यता की विरासत है। बीते वर्षों का प्रत्येक पल हमारे लिए प्रेरणा का अविरल स्रोत प्रवाहित करता रहा है। भारत की भूमि पर भारत माता की कोख से अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया है। डाॅ. बाबा साहेब आंबेडकर का उनमें एक महत्वपूर्ण स्थान है। महान विचारक, कर्मयोगी, मन से, वचन से, कृति से निरंतर संघर्षरत डाॅ. साहेब की गणना उन महापुरुषों में होती है, जिनके व्यक्तित्व, कृतित्व ने न केवल इतिहास में अपना स्थान बनाया, बल्कि उस काल के घटनाचक्र को भी एक निश्चित दिशा दी।

डाॅ. बाबा साहेब ने अछूत और निम्न वर्ग के मानव की समता के लिए समाज में एक चिंगारी प्रकट की। वे निर्भय क्रांतिवीर थे। भारत के उस कालखंड में व्याप्त कुरीतियों से उन्होंने दलित समाज को ऊपर उठाया था, परंतु किसी बदले की भावना से नहीं। डाॅ. आंबेडकर वंचितों और दलितों के अधिकार के लिए लड़ते थे। वे समस्त विश्व के महामानव थे। एक बात तो समझनी चाहिए कि अगर जीवन में प्रगति करनी है, तो डाॅ. आंबेडकर ने जो रास्ता बताया है, उसी पर चलना पड़ेगा। बौद्ध परंपरा में और बौद्ध धर्म में एक ही बात की गूंज है-‘अप्प दिप्पो भव’। दूसरे शब्दों में कहें तो आत्मदीपो भवः। अर्थात् स्वयं प्रकाशित हो, अंधकार तुम्हारे पास नहीं आएगा। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी अंधकार को अपने पास फटकने नहीं दिया। शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए बाबा साहेब से बड़ी कोई प्रेरणा नहीं हो सकती है।

उन्होंने 1942 में शिड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन के अधिवेशन में 20 हजार अस्पृश्य महिलाओं का आह्वान किया था- आप स्वच्छ रहिए, दुर्गुणों से दूर रहिए, अपनी संतानों को अच्छी तरह शिक्षित कीजिए। अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग और भारत में डाॅ. आंबेडकर ने अपना जीवन दबे-कुचले लोगों के अधिकार के लिए संघर्ष करते हुए बिता दिया।

बाबा साहेब ने इंग्लैंड से डिग्री ली। बैरिस्टर बने थे। चाहते तो रुपयों के ढेर लगा देते, लेकिन उन्होंने देशवासियों की सेवा में जीवन अर्पित कर दिया। उन्हें समाज की चिंता थी। बाबा साहेब, पं. नेहरू के मंत्रिमंडल में कानून मंत्री थे, परंतु उनके हृदय में तो समाज हित की अखंड धारा बह रही थी, इसलिए वे मंत्री पद त्याग कर समाज के काम पर निकल पड़े।

आजादी के बाद पूरे देश में कांग्रेस की सरकार थी। तब देश में लोग बाबा साहेब को कम से कम पहचानें, इसके लिए योजना पूर्वक कार्यक्रम बनाया गया था। कांग्रेस ने खुद योजनाबद्ध तरीके से दो महापुरुषों के प्रति अन्याय किया था। एक थे सरदार पटेल और दूसरे बाबा साहेब आंबेडकर। पूरे देश से इनका संपूर्ण परिचय ही नहीं होने दिया। यही कारण है कि आज भी समाज के अंदर बाबा आंबेडकर और सरदार पटेल की कमी महसूस होती है। बाबा साहेब को भारत र| पुरस्कार मिले, इसके लिए हम सबको आंदोलन करना पड़ा।

समाज के दृष्टिकोण को बदलने के लिए 14 अप्रैल से 5 मई, 2018 तक ग्राम स्वराज अभियान, सबका साथ, सबका विकास कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। झारखंड के सभी लोगों से अपील है कि गरीब और वंचित परिवारों के जीवन में समृद्धि लाने के लिए आगे आएं। राज्य की सवा तीन करोड़ जनता समाज में समता, ममता एवं समरसता लाने और नए झारखंड के निर्माण में सहभागी बने।

खबरें और भी हैं...