सांसारिक सागर पार करने के लिए गुरु का मार्गदर्शन जरूरी : माधवानंद
जीवन में गुरु का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है। सांसारिक जीवन रूपी सागर को पार करने के लिए गुरु का मार्गदर्शन अति महत्वपूर्ण होता है। यह उद्गार चिन्मय मिशन रांची के आचार्य स्वामी माधवानंद जी के हैं। उन्होंने ये बातें शिव साईं मंदिर, न्यू एजी कॉलोनी में शुक्रवार को रामचरितमानस प्रवचन के दौरान कहीं। गुरु वंदन पर विशेष प्रकाश डाला। कहा कि हर इंसान की सफलता का श्रेय गुरु को जाता है, चाहे उसका गुरु जो भी हो। इंसान जब किसी को गुरु मानता है, तो वह उनके आदर्शों को समझता है और उनकी हर गतिविधि से कुछ सीख लेते हुए उसका अनुपालन कर मुकाम हासिल करता है। स्वामी माधवानंद ने कहा कि तुलसीदास के जीवन पर गौर करें, तो यह पाएंगे कि वे जीवन में माता-पिता के प्रेम से वंचित रहे। गुरु की छत्रछाया में ही उन्होंने ज्ञान हासिल किया। भक्ति पाई।
स्वामी माधवानंद ने बताया कि तुलसीदास के अनुसार गुरु के चरण कमल पराग की तरह सुवासित और प्रेम रस से युक्त होते हैं। उन्होंने हनुमान चालीसा में इसी का बखान किया है। ज्ञान व वैराग्य को गुरु के दो नेत्र बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि इन्हीं दो नेत्रों के कारण रामचरितमानस को जान पाते हैं। इसी ज्ञान के आलोक में हम विप्र संतों, साधुओं की वंदना करते हैं। संतों के सत्संग से मन और हृदय पवित्र होता है।