मुख्यमंत्री जनसंवाद के बैनर तले मानपुर पंचायत में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत मानपुर पंचायत की मुखिया सबीना बीवी , प्रखंड विकास पदाधिकारी राजेश कुमार एक्का ,और अंचलाधिकारी निशांत अंबर ने संयुक्त रूप से की ।
कार्यक्रम में उपस्थित कई गणमान्य लोगों और ग्रामीण महिलाओं ने कहा पहली बार सरकार की ओर से इस तरह का कार्यक्रम मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र के माध्यम से उनकी पंचायत में आयोजित किया गया है। इससे लोगों को काफी लाभ मिलेगा। जन जागरूकता कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र व माइका ग्रुप (संवाद एवं समाधान) के प्रतिनिधि मिथिलेश सिंह ने जनसंवाद केंद्र का संक्षिप्त परिचय व कार्यप्रणाली सहित 40 से ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। साथ ही लोगों से 181 पर फोन कर योजनाओं की जानकारी लेने सहित आपातकालीन स्थिति में जनसंवाद सहकर्मी से सहयोग लेने के लिए संपर्क करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना, शादी शगुन योजना, तेजस्विनी योजना, कब्रिस्तान घेराबंदी योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, झारखंड श्रमिक पेंशन योजना, झारखंड जलाहार योजना, छात्रवृत्ति योजना, लक्ष्मी लाडली योजना, साइकल वितरण योजना, उद्यमी सखी मंडल योजना, शादी शगुन योजना, शिक्षा विकास योजना, फसल बीमा योजना, दुधारू मवेशी वितरण योजना सहित लगभग 40 से ज्यादा योजनाओं के बारे में लोगों को बताया गया। कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी राजेश एक्का ने कहा कि आपको मिलने वाली सुविधाओं को खुद से जागरूक होकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पता करना होगा, तब धरातल पर आपका विकास दिखेगा। सरकार एवं जनसंवाद की टीम गांव-ग्रामीण तक पहुंच रही है, जब कभी मेरी जरूरत हो या जनजागरूकता कार्यक्रम की जरूरत हो मै हमेशा तैयार हूं। अंचलाधिकारी ने उपस्थित जनता को साधुवाद देते हुए कहा, रमजान के पावन महीने में उपवास में भी आप सब उपस्थित रहे, आप सब सरकार की योजनाओं के बारे में जानने को उत्सुक हैं, जो तारीफ़ के काबिल है। उन्होंने कहा योजनाओं का लाभ पाने के लिए बिचौलिए का सहारा न लें। मानपुर पं. की मुखिया सवीना बीबी, ने जन जागरूकता कार्यक्रम की सराहना की और उनसे संबंधित योजनाओं के बारे में लोगों को बताया। साथ ही मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र की कार्यप्रणाली व जनजागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के प्रयास को सराहा और कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन नियमित रूप से होना चाहिए, ताकि गांव के अंतिम व्यक्ति को योजनाओं का लाभ मिल सके।