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जमानती अपराध में कोर्ट ने जेल भेजने का आदेश दिया

3 वर्ष पहले
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कोर्ट ने जमानती अपराध के आरोपी से जमानत के लिए पूछे बिना उसे जेल भेजने का आदेश दे दिया। इसके बाद आरोपी के अधिवक्ता ने संक्रामक रोग के आधार पर जमानत मांगी। जांच अधिकारी की ओर से पेश दस्तावेज देख कर कोर्ट ने आरोपी को बेल पर रिहा कर दिया। जमानत आदेश में सरकारी वकील की अोर से भी जमानत का विराेध किया जाना दर्ज है, हालांकि वकीलों ने इससे इंकार किया है। कस्टम्स ने 800 ग्राम सोना तस्करी करते सीकर जिला निवासी कैलाश चंदर को पकड़ा। नियमानुुसार एक करोड़ रुपए से कम कीमत के माल की तस्करी जमानती अपराध है। बरामद सोने की कीमत 24 लाख रुपए ही थी। ऐसे में आरोपी कैलाश से गिरफ्तारी के बाद एयरपोर्ट पर ही जमानत देने को कहा गया। जिससे उसने मना कर दिया। इन मामलों की नियमित तौर पर सुनवाई करने वाले आर्थिक अपराध न्यायालय का 25 मार्च को अवकाश था। इस कारण लोक अभियोजक आर.एन. यादव के माध्यम से आरोपी को अवकाशकालीन कोर्ट (महानगर मजिस्ट्रेट(पूर्व) में पेश किया गया। जिसमें तत्कालीन मजिस्ट्रेट प्रियंका पारीक ने सुनवाई की। जांच अधिकारी सौरभ अरोड़ा ने रिपोर्ट पेश की। जिसमें अपराध जमानती होना बताते हुए गिरफ्तारी का कारण लिखा था। इसके बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का अनुरोध किया। कोर्ट ने केस डायरी देख आरोपी को दो दिन के लिए जेल भेजने का फैसला किया। जिसमें दो दिन बाद आरोपी को संबंधित न्यायालय में पेश करने का निर्देश था। साथ ही आरोपी को जेल भेजने का वारंट बनाने का आदेश भी दिया। इसके बाद बचाव पक्ष के वकील सत्येन्द्र सिंह राठौड़ ने आरोपी के श्रमिक होने और संक्रामक रोग से ग्रसित होने के आधार पर जमानत मांगी। बेल आर्डर के अनुसार लोक अभियोजक ने विरोध किया। कोर्ट ने विभागीय दस्तावेजों के आधार पर दो लाख के मुचलके और इतनी ही रकम के जमानती की शर्त पर जमानत ली।

आदेश सुनते ही मैंने अपराध जमानती होने का तथ्य कोर्ट में दोहराया। जज को संबंधित सरक्यूलर भी मंगवाकर दिया था। उसके आधार पर ही जमानत का फैसला आया है। -आर.एन. यादव, लोक अभियोजक, कस्टम्स

व्यवस्था नहीं होने के कारण एयरपोर्ट पर जमानत नहीं दी। आदेश होते ही लोक अभियोजक ने अपराध को जमानती बताया। उन्होंने जमानत का विरोध नहीं किया था। - सत्येन्द्र सिंह, अधिवक्ता, बचाव पक्ष

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