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भगवान का दोस्त बनना है?

3 वर्ष पहले
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एक बच्चा कड़कड़ाती ठंड में कैची, कंघा, कांच जैसी रोजमर्रा की चीजें बेच रहा था। एक सज्जन दूर खड़े यह देख रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि बच्चे के पैरों में जूते नहीं हैं। उन्होंने बाजार से जूते खरीदें और उस बच्चे को दे दिए। बच्चे ने फौरन डिब्बे से जूते निकाले और पहन लिए। उसका चेहरा प्रसन्नता से दमक उठा। फिर वह बच्चा सज्जन की ओर मुड़ा और बोला, ‘क्या आप भगवान हैं?’ वे सज्जन घबराकर बोले, ‘नहीं बेटा नहीं, मैं भगवान नहीं हूं।’ यह सुनकर लड़का मुस्कराया, ‘फिर आप जरूर भगवान के दोस्त होंगे, क्योंकि कल मैंने भगवान से कहा था कि वे मुझे नए जूते दे दें।’ सज्जन ने प्यार से उस बच्चे के माथे को सहलाया। वे जान चुके थे कि भगवान का दोस्त बनना इतना भी मुश्किल नहीं है। खुशियां बांटने से मिलती है। बस यह मत सोचना कि कौन अपना, कौन पराया।

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