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मकान की छत पर ही बसाई मधुमक्खियों की कॉलोनी, 4 माह में बेचा 2500 किलो शहद

3 वर्ष पहले
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सरूपगंज. काछोली गांव में किसान ने छत पर ही मधुमक्खियों का घर लगाकर कॉलोनी बनाई।

भालुओं से बचने के लिए घर की छत पर बसाई मधुमक्खियों की कॉलोनी

आसपास घना जंगल होने से यहां भालू का विचरण आम बात है। काछोली में भालुओं का अक्सर आना जाना रहता है, इसलिए उन्होंने मधुमक्खी पालन के घर अपने मकान की छत पर लगाकर उनकी सुरक्षा की है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियों के मेटिक का समय मार्च माह है। घर की छत पर बनाई गई इस कॉलोनी में प्रत्येक बक्से को तीन तीन फिट की दूरी पर लगाया जाता है। एक बार घर लगाने के बाद उसे हिलाया नहीं जाता, नहीं तो बाहर गई मधुमक्खी वापस उसी घर में नहीं आ सकती और उसकी मौत हो जाती है।

इशाक अली को मिल चुके है कई पुरस्कार

मधुमक्खी के छत्ते से बने मोम से बनाते है घर

इशाक अली ने बताया कि लकड़ी के एक बक्से में करीब चार पांच लकड़ी के ऊपर मधुमक्खी के छत्ते से बने मोम के कागज को उसके अंदर लगाया जाता है तथा मधुमक्खियों को उसमें छोड़ दिया जाता है, जिस पर मधुमक्खियां अपना घर बनाती है। एक बक्से में करीब सात से आठ हजार मधु मक्खी रहती है।

मौसम के हिसाब से करते हैं शिफ्ट

मधुमक्खी पालन के कई नियम कायदे भी है। अक्सर मधुमक्खी का समय नवंबर से अप्रैल माह तक का मौसम उनके अनुकूल होता है। उसके बाद इनकों अच्छी जलवायु वाले क्षेत्र में शिफ्ट करना पड़ता है। करीब चार किलोमीटर के दायरे के बाहर उसे कहीं पर भी शिफ्ट किया जा सकता है।

काछोली गांव के किसान इशाक अली ने सौंफ की उन्नत व नई तकनीकी खेती से विभिन्न पुरस्कार हासिल किए है। इसमें जगजीवनराम अभिनव पुरस्कार, फार्मा साइंटिस्ट सीटा अवार्ड, बीजी मसाला उद्योग र| अवार्ड, किसान वैज्ञानिक प्रमाण पत्र व हाल ही में 6 मार्च 2018 को किसान सम्राट सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

पांच प्रकार की होती हैं मधुमक्खियां

किसान इशाक अली ने बताया कि मधुमक्खियां पांच प्रकार की होती है। एपिस इंडिका, एपिस मेलिफेरा, डोरसेटा, एपिस सेराना व स्टिगलेस। उन्होंने बताया कि एपिस मेलिफेरा अन्य की अपेक्षाकृत बड़ी होती है तथा यह शांत दिमाग की होती है जो ज्यादा काटती नहीं है तथा इससे शहद का उत्पादन भी ज्यादा होता है।

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