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इलेक्ट्रोपैथी का बिल पास, पर 40 दिन में बोर्ड तक नहीं बना

3 वर्ष पहले
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पॉलिटिकल रिपोर्टर. जयपुर | विधानसभा में 10 मार्च को राजस्थान इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति विधेयक, 2018 तो पारित कर दिया, लेकिन उसके नियम कायदे और मान्यता संबंधी प्रक्रिया अब भी अधूरी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने सदन में 40 दिन पहले विधेयक पारित करवाते वक्त कहा था कि यह चिकित्सा पद्धति बिना चीर फाड़ से इलाज में कारगर साबित होगी। जल्द लागू करेंगे, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया जा सका है।

इलेक्ट्रोपैथी औषधियां पौधों के रस से बनती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक 114 औषधीय पौधों के रस को अलग अलग मात्रा में मिलाकर अलग अलग दवाओं का निर्माण और लैब टेस्टिंग से उपचार की प्रामाणिकता साबित की जा चुकी है। हालांकि 80 प्रकार के और पौधों के रस को भी शामिल किया जाना है, लेकिन उनको अभी मान्यता नहीं है। इलेक्ट्रोपैथी उपचार व्यवस्था की धारणा यह है कि औषधीय पौधों में बायो ऊर्जा शरीर की असंतुलित बायो ऊर्जा को संतुलित करती है। बिल लागू करने से पहले इलेक्ट्रोपैथी पद्धति के लीगल आस्पेक्ट एवं वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए सरकार द्वारा समितियां बनाई गई। बिल लागू होने के बाद अन्य पैथी से सस्ता इलाज इलेक्ट्रोपैथी से मिलेगा। इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। इलेक्ट्रोपैथी में औषधीय अर्क खून और शरीर रस को साफ करता है तथा जिस बीमारी की दवा दी जाती है, उसका असर सीधे उसी अंग पर होता है, जिससे बीमारी जल्द ठीक होती है।

अभी यह होना बाकी

सरकार द्वारा बिल पारित करने के बाद अब इलेक्ट्रोपैथी का भी होम्योपैथी-आयुर्वेद की तरह अलग बोर्ड गठित किया जाएगा। बोर्ड के माध्यम से ही पैथी को लागू करने के नियम कायदे बनाए जाएंगे। उसके बाद इसके कोर्स और रिसर्च के मानक तय होंगे। शिक्षा व्यवस्था और डिग्री का निर्धारण होगा। चिकित्सकों और दवाओं का पंजीयन किया जाएगा। इलेक्ट्रोपैथी की दवाओं के मेन्यूफेक्चरिंग आदि के लाइसेंस देने की व्यवस्था हो सकेगी। इसके बाद इसके चिकित्सकों को विधिवत रूप से डॉक्टर का दर्जा मिलेगा और सरकारी स्तर पर भी इलाज में सुविधाएं होंगी।

भारत में 1953 से यह चिकित्सा पद्धति चल रही है। हम 100 में 95 मरीजों की किडनी के पत्थर को बिना ऑपरेशन के सफलता पूर्वक इलेक्ट्रोपैथी से निकाल देते हैं। अभी बिल पास हुआ है। सरकार स्तर पर लागू होने में अभी समय लगेगा। दिल्ली के कुछ संस्थान इसकी डिग्री भी प्रदान कर रहे हैं। राजस्थान में मान्यता और पंजीकरण की प्रक्रिया अब शुरू होंगी। डॉ. हेमंत सेठिया, विशेषज्ञ, इलेक्ट्रोपैथी

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