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बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ने वाली बद्री तुलसी विलुप्त होने की कगार पर, इससे हृदयरोग की दवाएं बनती हैं

3 वर्ष पहले
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बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन करने वाले श्रद्धालु हर साल बढ़ रहे हैं। इस साल पिछले 50 दिनों में छह लाख से ज्यादा श्रद्धालु भगवान विष्णु के दर्शन के लिए यहां पहुंच चुके हैं। करीब-करीब सभी श्रद्धालु मंदिर में बद्री तुलसी को प्रसाद के तौर पर चढ़ाते हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि मध्य हिमालयी क्षेत्र में उगने वाली बद्री तुलसी की प्रजाति खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है। उत्तराखंड वन विभाग की ओर से तैयार रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। इसके बाद अब राज्य का वन विभाग बद्री तुलसी की प्रजाति को बचाने की जद्दोजहद में जुट गया है। इससे हृदयरोग जैसी कई बीमारियों की दवाएं बनाई जाती हैं। राज्य वन विभाग के अनुसंधान डिवीजन के वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि देववन इलाके में 2800 मीटर की ऊंचाई पर .50 हेक्टेयर भूमि को लिया गया है। इसमें बद्री तुलसी को उगाया जाएगा और अनुसंधान किया जाएगा जिससे इसे संभाल कर रखा जा सके।

उत्तराखंड वन विभाग की रिपोर्ट में सामने आया तथ्य, बचाने के लिए अलग से संरक्षित करने की तैयारी

हृदय रोग, मलेरिया जैसी बीमारियों में कारगर
बद्री तुलसी का उपयोग एंटी बैक्टीरियल एंटीफंगल, एंटी इनफ्लेमेट्री, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी पैरासाइट में होता है। इसके बीज और पत्तियों का उपयोग पाचन क्रिया से संबंधित रोगों, सिर दर्द, सर्दी-जुकाम, मलेरिया, हृदय रोग, दंत रोग, फूड पॉइजनिंग, स्नायुतंत्र को मजबूत करने, मोटापा कम करने और सौंदर्य प्रसाधन बनाने में किया जाता है।

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