अच्छे कामों का प्रदर्शन मत कीजिए
अच्छे काम कम शोर के साथ करिए और बुरे काम का यदि हल्ला हो रहा हो तो होने दीजिए। इसका फायदा यह होगा कि हम चाहते हैं बुरे काम नहीं करें फिर भी हो जाते हैं। यदि गलत काम का प्रचार-प्रसार होगा तो आप निश्चित रूप से चाहेंगे कि अपने आप को इससे बचाएं। और जब भी कोई अच्छा काम करें, बड़ी खामोशी से करके गुजर जाइए। अच्छे काम का हल्ला करेंगे तो एक तो ऊर्जा नष्ट होगी और दूसरा आप में अहंकार आ जाएगा। यह भी नुकसान है। बुरे काम का शोर होगा तो वह एक तरह का चेक बन जाएगा, आप अपने आप नियंत्रित होने लगेंगे। और अच्छा काम करते समय जितनी खामोशी होगी, आपकी कामयाबी खुद उतना शोर कर देगी। फिर क्यों अच्छे कामों का हल्ला करें? हम ऐसा कर रहे हैं, हम वैसा कर देंगे, जो कोई और न कर पाया हो उसे हम कर दिखाएंगे। ये सारे दावे शोर ही है। ध्यान रखिए, यदि गलत कार्य करते हुए कुमार्ग पर लंबे चले गए तो लौटने में भी उतनी ही ज्यादा देर लगेगी। अगर थोड़ा खामोश रहने की आदत है तो आप गलत मार्ग पर जाने के बाद भी छलांग लगाकर लौट सकते हैं। खामोशी के लिए अपने भीतर एक शून्य पैदा करना होगा और यह संभव होता है किसी गुरु द्वारा दिए गए मंत्र से। इसलिए जीवन में किसी न किसी को गुरु जरूर बनाइए। सच्चा गुरु यह बात जरूर समझाता है कि अच्छे का प्रदर्शन करो मत और बुरे को प्रदर्शित होने से रोको मत। कोई योग्य गुरु ढूंढ़िए और नहीं मिले तो हनुमानजी को ही गुरु तथा हनुमान चालीसा को गुरुमंत्र बना लीजिए।
पं. िवजयशंकर मेहता
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