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अयोध्या विवाद: हिंदू संगठनों की बयानबाजी पर मुस्लिम पक्षकार ने सुप्रीम कोर्ट में जताया ऐतराज

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली | अयोध्या विवाद को लेकर मुस्लिम पक्षकारों ने हिंदू संगठनों की बयानबाजी पर ऐतराज जताया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों ने दलील दी कि मामला अदालत में लंबित है, लेकिन हिंदू संगठनों की ओर से बयानबाजी की जा रही है। यह अवमानना जैसा है। उन्होंने कहा कि हमने इस मामले में संयम बरता हुआ है और खुद को अनुशासित कर रखा है।

लेकिन हिंदू पक्ष की ओर से फैसले से पहले ही बयानबाजी हो रही है। मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच से कहा कि मामले को पांच जजों की संवैधानिक बेंच को भेजा जाना चाहिए। उन्होंने इस्माइल फारुखी जजमेंट का हवाला दिया और कहा कि उस जजमेंट को ध्यान में रखकर ही हाईकोर्ट ने फैसला दिया है। 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है और नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है। मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि इस फैसले को दोबारा देखा जाए, उसके बाद ही जमीन विवाद मामले की सुनवाई की जाए। धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष की ओर से लगातार दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। जजमेंट से पहले इस तरह की बयानबाजी पर रोक होनी चाहिए।



हिंदू पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ वकील के परासरन ने दलील शुरू की। अगली सुनवाई 17 मई को होगी।

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