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जल स्वावलंबन अभियान : 2.5 लाख से ज्यादा नए जलस्रोत मिले

3 वर्ष पहले
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जल संरक्षण के लिए प्रदेश में चलाया जा रहा जलस्वालंबन अभियान का मॉडल दुनिया के दूसरे देश भी अपना रहे हैं। ब्रिक्स देश व आस्ट्रेलिया के मरे डार्लिंग रिवर बेसिन में भी पानी बचाने के लिए इस अभियान को अपनाया गया है। प्रदेश में इस अभियान के 3 चरण पूरे हो चुके हैं जिसमें अब तक 2.61 लाख जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है व 88 लाख पौधे लगाए गए हैं। यह जानकारी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को दुर्गापुरा के कृषि प्रबंध अनुसंधान संस्थान (सियाम) में हुई जल स्वावलंबन कार्यशाला में दी। राजे ने कहा कि राजस्थान को जल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अभियान में बेमिसाल काम हुआ है। बीकानेर में जोहड़, नागौर में टांकों के निर्माण और झालावाड़ में व्यापक जनभागीदारी जैसे कई ऐसे उदाहरण हैं, जिन्होंने दिखाया है कि टीम वर्क और बेहतर प्लानिंग से कैसे हम प्रदेश में पानी के लिए आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने एमजेएसए में उल्लेखनीय कार्य के लिए एसीएस कृषि नीलकमल दरबारी, जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव रजत मिश्र, जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव शिखर अग्रवाल, वन विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक अनिल गोयल, स्वायत्त शासन सचिव नवीन महाजन, नदी बेसिन प्राधिकरण के आयुक्त एमएस काला, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक डीएन पांडे, स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक पवन अरोड़ा सहित करीब 20 अधिकारियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया।

12 हजार गांव अभियान में होंगे कवर

राजस्थान रिवर बेसिन अथॉरिटी के चेयरमैन श्रीराम वेदिरे ने कहा कि जून में प्रदेश के 12 हजार गांव अभियान में कवर हो जाएंगे। इसी साल सितंबर से शुरू होने वाले चौथे चरण में 4000 गांवों में 1.25 लाख से अधिक जल संरक्षण ढांचे बनाए जाएंगे। उन्होंने पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों के लिए ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट, स्टेट वाटर ग्रिड प्रोजेक्ट आदि की जानकारी दी।

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