जयपुर| सरकार की तरफ से स्पष्ट आदेश नहीं होने से पिछले 6 साल से प्रदेश में एकल पट्टे के प्रकरणों में उप विभाजन की कार्यवाही निकायों द्वारा नहीं की जा रही है। एकल पट्टा युक्त बड़े बड़े भू-भागों के छोटे टुकड़े कर कॉलोनी नहीं काट पाने से कई शहरों में नई कॉलोनियों की बसावट रुकी हुई थी। अब नगरीय विकास विभाग ने आदेश जारी किए हैं कि प्राधिकरणों और यूआईटी स्तर पर एकल पट्टे वाले प्रकरणों में टाउनशिप पॉलिसी 2010 के प्रावधानों के तहत उपविभाजन की कार्यवाही की जाए। अब सिंगल पट्टे वाले भूखंड के बंटवारे कर नए छोटे छोटे प्लॉटों के पट्टे जारी किए जा सकेंगे।
आदेशानुसार कृषि भूमि के अकृषि प्रयोजनार्थ रुपांतरण के बाद जारी एकल पट्टे के भूखंड का ले-आउट प्लान अनुमोदन रुका हुआ है। ऐसे प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रकरण हैं। ऐसे एकल पट्टों वाले भूखंडों का राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी 2010 के प्रावधानों के तहत भूखंड पर एक से अधिक भूखंडों मय सड़क आदि का ले-आउट प्लान प्रस्तावित किया जाता है तो उसे मंजूरी दी जाए। टाउनशिप पॉलिसी में प्रावधान किए गए हैं। ले-आउट प्लान में आंतरिक विकास के लिए नियमों की पालना भी टाउनशिप पॉलिसी के तहत की जाए। निकायों को एकल पट्टे के प्रकरणों में यदि उपविभाजन करवाया जाता है तो नियमानुसार उपविभाजन शुल्क तथा अन्य देय शुल्क जमा करवाने होंगे।