पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • सुनवाई से पहले परिणाम भले ही आ जाए, अनियमितता मिली तो अगली कार्रवाई रुकवा भी सकते हैं: हाईकोर्ट

सुनवाई से पहले परिणाम भले ही आ जाए, अनियमितता मिली तो अगली कार्रवाई रुकवा भी सकते हैं: हाईकोर्ट

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
2011: इस परीक्षा में पेपर में हास्यास्पद गलतियां सामने आईं। पेपर में कई प्रश्नों के सही उत्तर पहले से ही बोल्ड आ गए। पेपर अलग-अलग सेट में आते हैं, लेकिन ये गलती केवल एक सेट में ही हुई थी।

2014: इस परीक्षा में भी अनियमितताएं हुईं। परीक्षा के परिणाम में दी गई आंसर-की पर खूब सवाल उठे और इस मामले में आयोजकों की ओर से गहन जांच करने के बाद क्लैट का परिणाम बदलना पड़ा।

एक्सपर्ट व्यू: ऐसी खामियां नई नहीं, हर बार नया आयोजक, इसीलिए होती है गफलत

इस फील्ड से मेरा करीब 20 साल पुराना जुड़ाव है। क्लैट में खामियां नई नहीं हैं। वर्ष 2011 से अब तक केवल 2016 की परीक्षाओं पर सवाल नहीं उठे। क्लैट आयोजन का हर बार दूसरी यूनिवर्सिटी को जिम्मा दे दिया जाता है। आयोजकों को अनुभव नहीं होने की वजह से ये गलतियां होती हैं। परीक्षा के लिए एक टीम बनाने के लिए भी एक याचिका लंबित है।

सागर जोशी, क्लैट विशेषज्ञ

2012: परीक्षा का पेपर बहुत टफ आया था, लेकिन इस परीक्षा में ऐसे कई सवाल पूछ लिए गए, जो आउट ऑफ कोर्स थे। इस परीक्षा को लेकर तत्कालीन स्टूडेंट्स भी न्यायालय की शरण में गए थे।

2015: इस परीक्षा की नियमानुसार 200 सवाल पूछे गए थे, लेकिन जब आंसर-की जारी की गई तो 200 में से 113 प्रश्नों के ही उत्तर जारी किए गए। वहीं पूर्व में स्टूडेंट्स को भेजी आंसर-की में जवाब मेल नहीं खा रहे थे।

2013: परीक्षा के दौरान कोई गलती नहीं हुई, लेकिन इस परीक्षा के दौरान परिणाम घोषित होने के बाद जब स्टूडेंट्स को कॉलेज आवंटित किए गए तो इस प्रक्रिया पर सवाल उठे और फिर से कॉलेज आवंटन हुआ।

2017: 15 सवालों के उत्तर पर सवाल उठे थे, इस मामले को भास्कर में उठाया गया और इसके बाद विशेषज्ञों की कमेटी बनी। आखिरकार आयोजकों को 9 गलतियां स्वीकार कर परिणाम जारी करने पड़े।

18 मई को प्रकाशित।

खबरें और भी हैं...