नाखुश रहना और दूसरों की प्रसन्नता छीनना भी एक तरह का आतंकवाद ही है। आज दुनिया आतंकवाद से जूझ रही है और धर्म के क्षेत्र में जब लोगों ने अपना पक्ष रखने के लिए हिंसा का सहारा लिया तो उसने भी नए आतंक का रूप ले लिया। जब पढ़े-लिखे और योग्य लोग आतंकवाद में उतरते हैं तो लंबे समय तक उसे मिटाना मुश्किल हो जाता है। धर्म का मतलब होता है श्रेष्ठता के आधार पर जीवन को ऊंचा उठाना। इसी धर्म में यदि इस तरह से आतंकवाद प्रवेश कर जाए तो फिर लोग धर्म से नफरत ही करेंगे। धर्म में पसरे इसी आतंकवाद के कारण लोग अपने सामान्य जीवन में अच्छी बातों से दूर होते जा रहे हैं। आतंकवाद जिंदा लोगों की सांसें ही नहीं छीनता, बल्कि शेष लोगों के जीने के साधन भी छुड़ा लेता है। आज जब पूरी दुनिया ‘एंटी टेरेरिज़्म डे’ मना रही है तो क्यों न हम भी उसके पक्ष में कोई ऐसा संकल्प लें कि यदि किसी को बड़ी खुशी नहीं भी दे सकें तो कम से कम अपने व्यवहार, आचरण और वाणी से उसके दुखों को कम तो कर ही सकते हैं। किसी को कोई खुशी धन, वैभव, विलास के साधन या किसी उपहार के रूप में ही दी जा सकती हो ऐसा जरूरी नहीं है। अन्याय, अत्याचार और आतंकवाद का विरोध (या समर्थन नहीं) करके भी आप अप्रत्यक्ष रूप से एक बड़े मानव समाज को खुशी दे सकते हैं। क्यों न आज ही से यह शुभ शुरुआत की जाए। पीछे मत हटिये, आतंकवाद से लड़ते हुए औरों की खुशी का जरिया बनिए, आपकी झोली स्वत: खुशियों से भर जाएगी।
पं. िवजयशंकर मेहता
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