पंजाबी भाषा एवं अध्यापक कल्याण सोसायटी का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन रविवार को कंबोज धर्मशाला में हुआ। सम्मेलन में प्रदेश भर के पंजाबी व संस्कृत अध्यापकों ने भाग लिया। सम्मेलन में पंजाबी व संस्कृत भाषा को बचाने के लिए भाषा बचाओं संघर्ष समिति का गठन भी किया गया। अध्यक्षता जिला प्रधान इंद्रजीत सिंह भट्टी ने की। मुख्य वक्ता के तौर पर संरक्षक पूर्ण सिंह बड़ैच, चेयरमैन दवेंद्र सिंह काहलो, प्रदेशाध्यक्ष करनैल सिंह चंद पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रणजीत सिंह ढिल्लो, महासचिव हरगुरजिंद्र सिंह पहुंचे। मुख्य वक्ता संरक्षक पूर्ण सिंह बड़ैच ने कहा कि पंजाबी व संस्कृत भाषाओं को कौशल व व्यवसाय विषयों के नाम पर खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।
वेदों की जननी संस्कृत व गुरुओं की भाषा गुरमुखी को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा। इन भाषाओं के बल पर ही हमारी सभ्यता व संस्कृति बची हुई है। पंजाबी भाषा हमारी मातृ भाषा है इसे आंच नही आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने हरियाणा में इसे दूसरी भाषा का दर्जा दिया हुआ है हरियाणा के कई स्कूलों में पंजाबी व संस्कृत भाषा के विद्यार्थी है और वे उक्त भाष के विषय पढऩे के इच्छुक है, लेकिन एनएसक्यायूएफ के नाम पर इन्हें पछाडऩे का काम किया जा रहा है जिससे दोनों विषयों पर आज संकट पैदा हो गया है। सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो संघर्ष का बिगुल बजाया जाएगा। सम्मेलन में हरियाणा में पंजाबी भाषा को तीसरी कक्षा से लागू करे, कौशल व व्यवसाय विषयों के नाम पर पंजाबी, संस्कृत व उर्दू भाषा के विषयों से छेड़छाड़ न करने की मांग रखी गई। इस मौके पर जिला प्रधान इंद्रजीत भट्टी, हरपाल टोहाना, डाॅ. अमरजीत सिंह, प्रो. सुखविंद्र सिंह, कश्मीर सिंह, नैब मंडेर, जसवंत कौर, छत्रपाल सिंह, इकबाल सिंह हमजापुर, डाॅ. बलविंद्र सिंह भी मौजूद थे।
रतिया। कंबोज धर्मशाला में पंजाबी भाषा एवं अध्यापक कल्याण सोसायटी के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में उपस्थित प्रदेशभर के अध्यापक।