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समर्थन मूल्य पर लहसुन तुलवाने के लिए किसान कर रहे भागदौड़

3 वर्ष पहले
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बकानी लहसुन समर्थन मूल्य खरीद केंद्र पर लहसुन तुलवाने के लिए किसानों ने भागदौड़ शुरू कर दी है। वहीं तौल कांटों पर लहसुन दिलवाने के लिए कई किसान शनिवार को रटलाई जनमित्र केंद्रों पर टोकन कटवाने पहुंचे तो दूसरी ओर खरीद केंद्रों पर मांगी जाने वाली टिप की नकल निकलवाने के लिए पटवारी के पास पहुंच रहे हैं। इसके चलते पटवार मंडलों में किसानों की आवाजाही रही।

किसानों का कहना है कि अधिक से अधिक लहसुन को समर्थन मूल्य के तौल कांटे तक ले जाएं ,जहां ग्रेडिंग के अनुसार जो लहसुन बिकेगा उसके तो वाजिद भाव मिलेंगे। बाद में जो लहसुन बच जाएगा उसे कम दामों में ही मंडियों में बेचेंगे या भाव के आने तक घरों में भर कर रखेंगे। ज्ञातव्य है कि रटलाई कस्बे सहित क्षेत्र के करीब 60 गांवों में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लेकिन इस वर्ष मंडियों में लहसुन के भाव बहुत कम होने से किसानों में निराशा है, बहुत अच्छी क्वालिटी का लहसुन भी 700-800 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक नहीं बिक पा रहा है। बकानी कस्बे में समर्थन मूल्य पर लहसुन खरीदी का तौल कांटा खुलने से किसान उम्मीद की आस लगाए बैठे हैं किसानों का मानना है कि सरकारी मापदंड के अनुसार जो लहसुन की फसल सही होगी, उसके तो वाजिब दाम मिल सकेंगे। जिससे किसानों की टूटी कमर को राहत मिल सकेगी।

क्षेत्र के किसान रामलाल, पन्नालाल, छगनलाल, ज्ञान सिंह, देवीलाल, बद्रीलाल ने बताया कि जिले में बड़े पैमाने पर लहसुन की बुवाई और उत्पादन हुआ है ऐसे में मात्र 3 कस्बों में समर्थन मूल्य खरीद केंद्र खोले जाना नाकाफी है। उनका कहना है कि जिले की तमाम कृषि उपज मंडियों और गौण मंडियों में लहसुन की समर्थन मूल्य पर तुलाई करवाई जानी चाहिए।

रटलाई. भाव के इंतजार में क्षेत्र के एक किसान के खलियान में पड़ा लहसुन ।

भास्कर न्यूज | रटलाई

बकानी लहसुन समर्थन मूल्य खरीद केंद्र पर लहसुन तुलवाने के लिए किसानों ने भागदौड़ शुरू कर दी है। वहीं तौल कांटों पर लहसुन दिलवाने के लिए कई किसान शनिवार को रटलाई जनमित्र केंद्रों पर टोकन कटवाने पहुंचे तो दूसरी ओर खरीद केंद्रों पर मांगी जाने वाली टिप की नकल निकलवाने के लिए पटवारी के पास पहुंच रहे हैं। इसके चलते पटवार मंडलों में किसानों की आवाजाही रही।

किसानों का कहना है कि अधिक से अधिक लहसुन को समर्थन मूल्य के तौल कांटे तक ले जाएं ,जहां ग्रेडिंग के अनुसार जो लहसुन बिकेगा उसके तो वाजिद भाव मिलेंगे। बाद में जो लहसुन बच जाएगा उसे कम दामों में ही मंडियों में बेचेंगे या भाव के आने तक घरों में भर कर रखेंगे। ज्ञातव्य है कि रटलाई कस्बे सहित क्षेत्र के करीब 60 गांवों में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लेकिन इस वर्ष मंडियों में लहसुन के भाव बहुत कम होने से किसानों में निराशा है, बहुत अच्छी क्वालिटी का लहसुन भी 700-800 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक नहीं बिक पा रहा है। बकानी कस्बे में समर्थन मूल्य पर लहसुन खरीदी का तौल कांटा खुलने से किसान उम्मीद की आस लगाए बैठे हैं किसानों का मानना है कि सरकारी मापदंड के अनुसार जो लहसुन की फसल सही होगी, उसके तो वाजिब दाम मिल सकेंगे। जिससे किसानों की टूटी कमर को राहत मिल सकेगी।

क्षेत्र के किसान रामलाल, पन्नालाल, छगनलाल, ज्ञान सिंह, देवीलाल, बद्रीलाल ने बताया कि जिले में बड़े पैमाने पर लहसुन की बुवाई और उत्पादन हुआ है ऐसे में मात्र 3 कस्बों में समर्थन मूल्य खरीद केंद्र खोले जाना नाकाफी है। उनका कहना है कि जिले की तमाम कृषि उपज मंडियों और गौण मंडियों में लहसुन की समर्थन मूल्य पर तुलाई करवाई जानी चाहिए।

रायपुर में सरकारी तौल कांटा शुरू होने से लहसुन की मांग बढ़ी

रायपुर. जिस लहसुन की फसल के लिए 8 दिन पहले किसान परेशान थे। उसी लहसुन के गौण मंडी में सरकारी तौल कांटा शुरू होने से किसानों में खुशी है। 8 दिन पहले जो लहसुन 300 से 1500 रुपए क्विंटल के भाव बिक रहा था। वह लहसुन 1500-2500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। कस्बे में सरकारी तौल कांटे पर 2 दिन में 800 क्विंटल लहसुन की खरीद हुई है। शनिवार को यहां खरीद नहीं हुई। रविवार को तौल कांटा बंद रहेगा। इस वर्ष लहसुन की फसल बाजार में आई तो भाव औंधे मुंह गिर गए। कई किसानों ने कम भाव में फसल बेच दी थी, लेकिन जिन किसानों ने इंतजार किया उनको इसका फायदा मिला।

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