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अक्षय तृतीया पर गांवों में शादियां, शहर में 5 की जगह ढाई टन मावा ही आया, बदलना पड़ा मीनू

3 वर्ष पहले
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राजपूत समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन गुरुवार को कालिकामाता मंदिर में होगा। राजपूत नवयुवक मंडल के राजेंद्रसिंह गोयल ने बताया मावा के दाम ज्यादा होने और नहीं मिलने के कारण मावे की मिठाई नहीं रखी है। मोतीपाक बनाएंगे। चंदनसिंह की साली की शादी बुधवार को बदनावर में शादी थी वे मावा लेने आए लेकिन नहीं मिला। इससे उन्हें फिर बदनावर एवं आसपास के गावों से ही व्यवस्था करना पड़ी।

पांच दिन से मावा व्यापारी बुकिंग बंद कर चुके थे, दस दिन से मिठाईवाले भी नहीं ले रहे थे मावा

40 रुपए की तेजी के साथ मावा 260 रुपए किलो बिका

भास्कर संवाददाता | रतलाम

अक्षय तृतीया पर शादियां होने से बुधवार को मावा नहीं मिला। शादी आयोजकों को परेशान होना पड़ा। आयोजकों को मावा नहीं मिलने पर मीनू बदलना पड़ा मावे की डिमांड ज्यादा होने से भाव 260 रुपए प्रतिकिलो रहे। गुरुवार से मावे की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है।

रतलाम का मावा फेमस है। आसपास के शहरों के लोग भी यहां मावा खरीदने आते है। ढेरों शादियां और बर्फी, गुलाब जामुन सहित अन्य मिलाकर 5000 किलो मावे की डिमांड थी। इसकी तुलना में 2500 किलो मावा ही पहुंचा। इससे मावा सुबह खत्म हो गया। शादी आयोजक मावा लेने दुकानों पर पहुंचे तो उन्हें मावा नहीं मिला। कई आयोजक बदनावर, बड़नगर से आए थे उन्हें लौटना पड़ा। मावा कारोबारियों के मुताबिक गावों भी शादियां होने से आधा मावा ही बुधवार को शहर तक पहुंचा। इससे परेशानी आई और मावा खत्म हो गया। इसके अलावा कई लोेगों ने एडवांस बुकिंग करा रखी थी, ऐसे में जो मावा आया वह उनमें खप गया।इधर दो दिन में मावे में 40 रुपए प्रतिकिलो की तेजी आ गई है। दो दिन पहले सोमवार को मावा 220 रुपए प्रतिकिलो था। वहीं बुधवार को यह 260 रुपए प्रतिकिलो बिका।

मावा नहीं मिलने से अब शादी में मोतीपाक बनाएंगे

ढाई टन मावा रोज गुजरात व महाराष्ट्र जाता है- ढेरों शादियां होने से मावा व्यापारियों ने पांच दिन पहले से मावे की बुकिंग बंद कर दी थी। आखातीज को लेकर शादी आयोजक बुकिंग के लिए पहुंचे तो बोले बुकिंग नहीं कर सकते आप जिस दिन शादी है उस दिन सुबह आ जाना मावा मिल जाएगा। आयोजन बुधवार को पहुंचे तो मावा मिला ही नहीं। शहर में 200 से ज्यादा मिठाई दुकानें है। इनकी रोज की 10 क्विंटल की डिमांड है। मावे की कमी देखते हुए इन्होंने पहले ही खरीदी कर ली थी। इतना ही मावा रोज गुजरात, महाराष्ट्र आदि शहरों में जाता है।

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