प्रजातंत्र के रिस रहे घाव, सिर पर पांव रखकर आ रहे चुनाव
प्रजातंत्र के रिस रहे घाव, सिर पर पांव रखकर आ रहे चुनाव... जनकवि श्याम माहेश्वरी ने ये पंक्तियां जनवादी लेख संघ की काव्य गोष्ठी में सुनाई। कार्यकारिणी के चुनाव भी हुए। मुख्य अतिथि रमेश चौहान थे। अध्यक्षता हरिशंकर भटनागर ने की। कीर्ति शर्मा ने जनगीत सुनाकर गोष्ठी का आगाज किया।
भगवतीलाल सोनी ने अंधेरा चीरकर उजाला निकल रहा है हर शाम बुनने लगती है उजाले के लिए जलना, आशा उपाध्याय ने कचरा बीनते बीनते बीती मेरी उमरिया, अच्छे दिन कब आएंगे मेर सांवरिया, डॉ. कविता सूर्यवंशी ने जल है तो जीवन है, जल बिन सब सूना, रमेश शर्मा ने स्टोर जलाना सीख रही है इन दिनों बिन्नो। हरिशंकर भटनागर, अब्दुल सलाम खोकर, आजाद भारती, दिनेश उपाध्याय, शांतिलाल जैन, रमेश चौहान ने काव्य पाठ किया। पत्रकार एवं समालोचक जयप्रकाश जायसवाल ने कहा लगातार गोष्ठियों में आने से हमारी रचनाएं परिमार्जित होती हैं। इसके बाद अश्विन शर्मा की मौजूदगी में चुनाव हुए। जिसमें जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा एवं महासचिव रणजीतसिंह राठौर चुने गए। 12 एवं 13 मई को मुक्तिबोध जन्म शताब्दी वर्ष के मौके पर दो दिनी कार्यक्रम की घोषणा की। इसमें साहित्यकारों का सम्मान किया जाएगा। आभार जलेस अध्यक्ष रणजीतसिंह राठौर ने व्यक्त किया।