पिता का निधन होने पर वर्ष 2011 में मां ने 40 हजार उधार लिए थे। 10 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज भरते हुए 8 साल हो गए फिर भी उधार नहीं चुका पाया। 5 लाख का हिसाब बताकर सूदखोर महिलाएं धमकाने लगीं तो बेटे ने दो-तीन महीने में मकान बेचकर उधारी चुकाने का आश्वासन दिया और सोमवार को जहरीली गोली खाकर फांसी लगा ली। सामान लेने कमरे में गए भतीजे ने देखा तो काका को फंदे से उतारा और पड़ोसी दोस्त की मदद से जिला अस्पताल में लाकर भर्ती कराया।
पुलिस के अनुसार ओसवाल नगर निवासी 30 वर्षीय अनूप पिता माणकलाल जैन को सोमवार शाम 4 बजे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। भतीजे अंशू पिता दिनेश जैन ने बताया दोपहर करीब 3.30 बजे काकी संगीता आगे के कमरे में सो रही थीं। वह पर्स लेने पीछे के कमरे में गया तो काका अनूप को पंखे पर बंधे फंदे से लटके देखा। अंशु ने काका को गोद में उठाया और मदद के लिए पड़ोसी दोस्त ऋषभ परमार को आवाज दी। ऋषभ ने कैंची से फंदा काटा और दोनों अनूप को जिला अस्पताल लाए।
अनूप ने बताया बड़ा भाई दिनेश सुखेड़ा में स्कूल चलाता है। मां के मांगने पर वह रुपए दे देता था। उसने हिसाब नहीं पूछा। ब्याज के चक्रव्यूह में फंसने के कारण पिछले सप्ताह मां सुंदरबाई घर छोड़कर चली गई थीं। उसे ढूंढ़कर लाए तब ब्याजखोरी का पता चला। सुंदरबाई ने बेटे अनूप को बताया 2011 में पिता माणकलाल जैन का निधन होने पर मां सुंदरबाई ने एक महिला से 40 हजार रुपए उधार लिए थे। दस प्रतिशत ब्याज वसूलने के कारण ब्याज भरने के लिए अन्य महिलाओं से उधारी हो गई। एक लाख रुपए बकाया बताकर तीन साल से वह महिला दस हजार रुपए महीना ब्याज वसूल रही है। एक साल के लिए 70 हजार रुपए उधार लेने पर एक अन्य महिला ने 14 हजार रुपए महीने की 15 किस्त बांध दी। दूसरी महिला से 30 हजार रुपए लिए थे, जिसका हर महीने 3 हजार रुपए ब्याज भरना पड़ रहा है। अनूप ने बताया उधार लिए रुपए चुकाने के चक्कर में उधारी बढ़ती गई। बातचीत की तो हिसाब 5 लाख से अधिक बताया। सूदखोर महिलाओं से मकान बेचकर उधार चुकाने का आश्वासन दिया परंतु महिलाएं तुरंत रुपए चुकाने के लिए दबाव बना रही थीं इसलिए हताशा में जान देने की कोशिश की।
जिला अस्पताल में अनूप के बयान दर्ज करते एएसआई जे.एस. तोमर।