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बैरागी के व्यक्तित्व तले लोगों ने सीखे राजनीति के जटिल पेंच

3 वर्ष पहले
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रतलाम | अकादमिक गतिविधियों से नागरिकता का बोध व चेतना विकसित करने की दिशा में कार्यरत ‘हम लोग’ संस्था के पदाधिकारी व सदस्यों ने कवि एवं पूर्व सांसद बालकवि बैरागी को श्रद्धांजलि अर्पित की है। दिवंगत बैरागी संस्था के उपाध्यक्ष व बीमा अभिकर्ता विष्णु बैरागी के बड़े भाई थे। अध्यक्ष सुभाष जैन, उपाध्यक्ष इंदरमल जैन, सचिव ओमप्रकाश ओझा व कोषाध्यक्ष वासुदेव गुरबानी के अनुसार साहित्य सृजन व राजनीति को एक साथ साध लेने वाला व्यक्ति ही अपने महाप्रयाण से चंद घंटे पहले ‘मृत्यु को महाउत्सव’ कह सकता है। बैरागी दादा चलती फिरती पाठशाला थे जिनके व्यक्तित्व तले कई लोगों ने राजनीति के जटिल पेंच सीखे और समझे। ‘चाहे सभी सुमन बिक जाएं, चाहे ये उपवन बिक जाएं, चाहे सौ फागुन बिक जाएं, पर मैं गंध नहीं बेचूंगा, अपनी गंध नहीं बेचूंगा ...’ जैसी पंक्ति के जरिए अपनी खुद्दारी व्यक्त करने वाली ऐसी शख्सियत का जाना पूरे राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है। संस्था पदाधिकारियों ने बैरागी परिवार को यह आघात सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।

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