आज समाज में वैचारिक रूप से महात्मा बनने की जरूरत है। आपका वेश भले ही महात्मा का न हो लेकिन आचरण महात्मा के रूप में होना चाहिए। इससे देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा होगी। रोटी, कपड़ा और मकान के अतिरिक्त परम आनंद को पाना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।
यह बात स्वामी चिदंबरानंद सरस्वतीजी महाराज ने श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठे दिन कही। राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष, विधायक एवं भागवत कथा आयोजक चेतन्य काश्यप ने लोगों से 23 से 29 मई तक बरबड़ में होने वाली कथा में धर्मलाभ लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा संतों की कृपा से ऐसे अवसर प्राप्त होते हैं। यह हमारे परिवार का सौभाग्य और पुण्योदय है कि हरिहर सेवा समिति के सहयोग से अधिक मास में कथा आयोजन का लाभ मिलने जा रहा है। श्रीहरिहर सेवा समिति एवं मोहनलाल भट्ट, श्यामा भट्ट ने पोथी पूजन किया।