अखिल भारतीय रामायण मेले में देश में अच्छी बारिश के लिए भागवत कथा में दोनों हाथ उठाकर श्रद्धालु रोज प्रार्थना कर रहे हैं। जड़वासा में रामायण मेला आयोजन समिति के तत्वावधान में 37 वां रामायण मेला अमृत प्रवचन, महाआरती व संत सम्मान के साथ समाप्त हुआ। अब 25 मई तक शाम 7.30 से रात 11 बजे तक ग्राम हरथली में रामायण मेले का आयोजन किया जा रहा है।
रामायण मेले की शुरुआत विश्व कल्याणार्थ, मानव जीवन में पारिवारिक स्नेह, अनुशासन एवं चरित्र निर्माण के लिए पूर्व धर्मस्व मंत्री स्व. पं. मोतीलाल दवे ने की थी। रामकथा में स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ ने कहा नारी विरह में जिसकी बुद्धि स्थिर हो जाए वह साधारण मनुष्य ही हो सकता है, ब्रह्म नहीं हो सकता किंतु राम ने ऐसा ही किया है। राम ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें रावण से अपने ब्रह्मतत्व को छिपाना था। पृथ्वी पर रावण का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। अहंकारी रावण को मनुष्य के अलावा कोई नहीं मार सकता थे, परमात्मा भी नहीं मार सकते। ऐसा वरदान रावण को ब्रह्माजी से प्राप्त था। रावण चार वेद, 6 शास्त्र का ज्ञाता था। उसे राम के रामत्व होने की शंका हुई तो उसने मारिच राक्षस को सोने का हिरण बना कर भेजा। अपना ब्रह्मत्व छिपाने के लिए राम स्वर्ण मर्ग के पीछे गए और सीता हरण हुआ। यह भगवान की ही लीला थी। लंका का युद्ध तो राम के लिए ऐसा था जैसे कोई मदारी अपने जमूरे को नचाता है। वास्तविक युद्ध तो दोनों के मस्तिष्क में हुआ था। राम मनुष्य होने का सजीव चित्रण कर रहे थे और रावण राम के रामत्व को प्रकट करने में लगा था। उन्होंने कहा कोई पशु मनुष्य को नचा सकता है, यह असंभव है। यह काम केवल मनुष्य ही कर सकता है क्योंकि मनुष्य ने ही सारी प्रकृति पर विजय प्राप्त की है। यदि मनुष्य में काम की भूख और पेट की भूख नहीं होती तो वह भगवान बन जाता। उन्होंने कहा वर्तमान का कर्तव्य है, वह भविष्य को सुरक्षित करें। भूतकाल हमारे हाथ में नहीं और भविष्य एक कल्पना है। जो बीत गया वो केवल याद है। हमारे हाथ में केवल वर्तमान है हमें वर्तमान को सुंदर बनाना चाहिए।
दोनों हाथ उठाकर अच्छी बारिश की कामना करते श्रद्धालु। इनसेट : प्रवचन देते स्वामी दिव्यानंदजी।
सतगुरु तेरे चरणों की गर धूल मिल जाए...
जय श्रीराम म्यूजिकल ग्रुप के गायक प्रकाश परमार ने प्रस्तुत भजन सतगुरु तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए, सच कहता हूं गुरुवर तकदीर बदल जाए... ने सभी को भाव-विभोर किया। पोथी पूजन व संतों का स्वागत मेला संयोजक पं. राजेश दवे, अनीता दवे, अध्यक्ष जितेंद्र परमार, पूर्व मंडी अध्यक्ष दिनेश शर्मा, दिलीप कुमावत आदि ने किया। पादुका पूजन शांतीलाल परमार (सप|ीक), लाखनसिंह पंवार (सप|ीक) ने किया। संचालन ध्रुव पारखी ने किया।
वक्त मझधार से पतवार छीन लेता है - उपाध्याय
मानस मर्मज्ञ पं. अखिलेश उपाध्याय ने वक्तसार से आधार छीन लेता है, वक्त मझधार से पतवार छीन लेता है। वक्त पर टेढ़ी नजर मत करना, वक्त चंगेज की तलवार छीन लेता है। इन पंक्तियों के साथ समय को कीमती बताते हुए कहा हमें राम कथा का आश्रय लेकर समय का सदुपयोग करना चाहिए। कैलाश पर्वत शांति का प्रतीक और साक्षात भगवान शिव की गोद है। आज सभी के मन में अशांति है। हमारे जीवन में शांति आ सकती है। इसके लिए हमें मौन रहना सीखना होगा। बोलना क्लेश को बढ़ावा और मौन शांति प्रदान करता है। मौन रहना बहुत कठिन है परंतु जीवन में शांति के लिए इससे बड़ी साधना और कोई नहीं है। मानस मंजरी चंदा मिश्र ने कहा जीवन में जो व्यक्ति त्याग करता है, उसको संत, महात्मा, धर्मात्मा जैसी उपाधि मिलती है।