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दावा 83 फीसदी भर्ती का, एमसीआई ने 63% ही माना, ओवर साइट कमेटी की सिफारिश के बाद मिलेगी मान्यता

3 वर्ष पहले
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हमारे मेडिकल कॉलेज की मान्यता अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ओवर साइट कमेटी के हाथ में चली गई है क्योंकि कॉलेज की ओर से दावा किया गया था कि 83 फीसदी पदों पर भर्ती कर ली गई है जबकि दौरे पर आई एमसीआई टीम ने इसे 63 फीसदी ही माना। टीम ने दूसरे कॉलेज से ट्रांसफर होकर आए प्रोफेसरों (20 फीसदी) को इसमें शामिल नहीं किया। इस पर हमारे मेडिकल कॉलेज के डीन और मप्र शासन ने ओवर साइट कमेटी को लिखित में दिया है कि प्रदेश के जिन सरकारी कॉलेज से प्रोफेसर ट्रांसफर होकर आए हैं, वहां इनके यहां आने से पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। इसलिए पदों की पूर्ति 83 फीसदी मानी जाए और एमसीआई के 75 फीसदी से ज्यादा भर्ती के मानक को पूरा मानकर मान्यता दी जाए। अब इस मामले में ओवर साइट कमेटी 30 मई से पहले बैठक करेगी और भारत सरकार के सामने अपना पक्ष रखेगी, उसी आधार पर मेडिकल कॉलेज की मान्यता तय होगी।

हमारे मेडिकल कॉलेज की कक्षाएं इस साल 1 अगस्त से शुरू होना हैं। इसके लिए भारत शासन से मिलने वाली मान्यता को लेकर कवायद चल रही है। एमसीआई की टीम ने पदों की पूर्ति को 63 फीसदी ही माना है इसके चलते प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित के जरिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ओवर साइट कमेटी के सामने अपील की है। इसमें बताया कि प्रदेश के ग्वालियर सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज से जो प्रोफेसर ट्रांसफर होकर आए हैं, इससे उन कॉलेजों को पढ़ाई में कोई परेशानी नहीं हो रही है। हमने यह उनके डीन से लिखवाकर भी ले लिया है। यह दस्तावेज डीन ने ओवर साइट कमेटी के सामने पेश किए हैं। ओवर साइट कमेटी में एम्स के डॉक्टर आदि शामिल रहते हैं।

मेडिकल कॉलेज की कक्षाएं व लाइब्रेरी भी तैयार

मेडिकल कॉलेज में टेबल-बैंच लग गए हैं। यहां बैठकर पहली बैच पढ़ेगी।

राजस्थान के 3 कॉलेजों को ऐसे ही मिली थी मान्यता

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया एमसीआई ने कुछ तकनीकी कारणों से सरकारी मेडिकल कॉलेज से ट्रांसफर होकर आए प्रोफेसरों को पद पूर्ति में शामिल नहीं किया है। पिछले साल ओवर साइट कमेटी की सिफारिश पर राजस्थान के तीन मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिली थी। प्रदेश शासन ने हमारे मेडिकल कॉलेज को अंडर टेकिंग भी दे दी है। इससे साफ है कि इस बार हमारे कॉलेज को भी मान्यता मिल जाएगी।

बचे प्रोफेसरों की भर्ती उज्जैन में हुई

बचे प्रोफेसरों की भर्ती के इंटरव्यू बुधवार को संभागायुक्त की मौजदूगी में उज्जैन में हुए। इसमें प्राध्यापक के 12, सहप्राध्यापक के 17 और सहायक प्राध्यापक के 19 पदों पर भर्ती की जाना है। गुरुवार को साफ होगा कि कितने पदों पर भर्ती पूरी कर ली गई है।

पूरी उम्मीद है मान्यता मिल जाएगी

मेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर मुख्यमंत्री को अवगत कराया है। उन्होंने स्वास्थ्य चिकित्सा मंत्री जेपी नड्डा को बताया है कि मेडिकल कॉलेज की कमियों की पूर्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री खुद इसकी पूरी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अधिकांशत: ओवर साइट कमेटी द्वारा पक्ष रखने पर भारत सरकार मान्यता दे देती है। हमें पूरी उम्मीद है कि अनुमति मिल जाएगी। चेतन्य काश्यप, उपाध्यक्ष-राज्य योजना आयोग व शहर विधायक

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