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किशोरी से ज्यादती के 8 माह बाद गर्भपात की दवा खिलाने और नवजात की हत्या करने वाले युवक को उम्रकैद
14 वर्षीय किशोरी से ज्यादती के 8 माह बाद गर्भपात कराने के लिए जबरन दवा खिलाई। बच्ची पैदा हुई तो मुंह में कपड़ा ठूंसकर मार डालने वाले 27 वर्षीय मुंहबोले फूफा को कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर सजा सुनाई। कोर्ट में किशोरी तथा अन्य गवाह बयान से पलट गए थे। डीएनए प्रोफाइल से सिद्ध हुआ कि मुंहबोला फूफा और पीड़िता जैविक माता-पिता हैं। न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने युवक को किशोरी से ज्यादती व नवजात की हत्या के आरोप में उम्रकैद तथा आठ धाराओं में 15,500 रुपए अर्थदंड किया।
जिला अभियोजन अधिकारी अनिल बादल ने बताया 14 वर्षीय किशोरी के माता-पिता दीपावली से चार दिन पहले 8 नवंबर 2015 को दो छोटे भाइयों को लेकर रिश्तेदारी में गए थे। मुंहबोला फूफा भंवरलाल उर्फ भंवर निवासी मऊखेड़ी दोपहर 3 बजे किशोरी के घर आया और उसे अपने घर ले गया। रात में तीन-चार बार ज्यादती की और जान से मारने की धमकी दी। आठ महीने बाद किशोरी का पेट फूला तो गैस की बीमारी समझकर पिता ने डॉक्टर को दिखाने का कहा। 18 जून 2016 को पिता ने भंवर को बुलाया और किशोरी को उसके साथ बाइक से अरनिया में कथित डॉक्टर दयाराम परमार के पास ले गए। दयाराम ने बताया किशोरी गर्भवती है। गर्भपात के लिए उसने किशोरी को चार इंजेक्शन लगाए और दयाराम की प|ी राजूबाई ने तीन गोलियां खिलाई। थोड़ी देर बाद किशोरी ने बालिका को जन्म दिया। भंवरलाल ने नवजात को नारायणी गांव ले जाकर गाड़ दिया। रात 8 बजे किशोरी और उसके पिता को घर छोड़कर भंवरलाल चला गया। इसके बाद किशोरी ने माता-पिता को ज्यादती की जानकारी दी। अगले दिन 19 जून 2016 को पिता उसे आलोट थाने ले गए और भंवरलाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने किशोरी की निशानदेही पर नारायणी खाल से नवजात का शव बरामद कर पीएम करवाया। आलोट के डॉ. पी.वी. फुलम्बीकर ने पीएम रिपोर्ट में बताया नवजात बच्ची का शव सलवार में बंधा था। 32 से 34 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद उसका जन्म हुआ। मुंह में कपड़ा ठूंसने के कारण दम घुटने से उसकी मौत हुई। पुलिस ने भंवरलाल, किशोरी और नवजात के रक्त का नमूना न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला ग्वालियर डीएनए टेस्ट के लिए भेजा। रिपोर्ट में पीड़िता और भंवरलाल को नवजात का जैविक माता-पिता बताया। पुलिस ने भंवरलाल के साथ दयाराम पिता कनीराम परमार (37), उसकी प|ी राजूबाई (34) तथा मेडिकल व्यवसायी मुकेश पिता लक्ष्मण प्रजापत (30) निवासी लसूडिया को सह आरोपी बनाकर कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में पीड़िता ने कथित डॉक्टर, उसकी प|ी व मेडिकल व्यवसायी को पहचानने से मना कर दिया। पाक्सो एक्ट मामलों के विशेष न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने बुधवार को फैसले में दयाराम, राजूबाई व मुकेश को बरी किया। अभियुक्त भंवरलाल पिता मांगूलाल उर्फ मांगू सूर्यवंशी (27) निवासी मऊखेड़ी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।