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भागवत कथा के पंडाल में भक्तों के लिए लगेंगे फॉगर, रोज होगा भंडारा

3 वर्ष पहले
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बरबड़ स्थित विधायक सभागृह में 23 से 29 मई तक चेतन्य काश्यप परिवार द्वारा श्री हरिहर सेवा समिति के तत्वावधान में महामंडलेश्वर स्वामी श्री चिदंबरानंद सरस्वतीजी महाराज संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ करेंगे। आयोजन की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। 25 हजार वर्गफीट पंडाल बनाया जा रहा है। इसमें रोज शाम 4 बजे से कथा होगी। पंडाल में कथा के दौरान शीतलता के लिए फॉगर भी लगाए जा रहे हैं। कथा के बाद जानकी मंडपम् में रोज भंडारा भी होगा। रविवार को विधायक व राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप ने कथा स्थल पर चल रही तैयारियों का जायजा लिया और व्यवस्थाओं के निर्देश दिए।

विधायक सभागृह में इंदौर से आए दल द्वारा विशाल पंडाल के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के लिए आकर्षक मंच भी तैयार किया जा रहा है। मंच के समीप ही विशिष्ट कक्ष भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें स्वामीजी से विशिष्टजन से मुलाकात कर सकेंगे। कथा स्थल पर वाहन पार्किंग के लिए भी विशेष व्यवस्था रहेगी। दोे पहिया वाहन सभागृह के पास खुली भूमि पर पार्क किए जा सकेंगे। अन्य वाहन आगे पार्क किए जाएंगे। कथा के बाद प्रतिदिन जानकी मंडपम् में आयोजित होने वाले भंडारे में पुरुषों और महिलाओं के लिए प्रसादी की अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। विधायक काश्यप ने आयोजन की तैयारियों का निरीक्षण किया। व्यवस्थाओं के निर्देश दिए। श्री हरिहर सेवा समिति के अध्यक्ष मोहनलाल भट्ट, मनोहर पोरवाल, निर्मल लुनिया, पार्षद प्रहलाद पटेल उपस्थित थे।

पहले दिन कलशयात्रा निकलेगी- कथा के पहले दिन बुधवार दोपहर 3 बजे बरबड़ रोड स्थित स्व. कल्याणमल पुरोहित के निवास जोधा बाग से कलशयात्रा भी निकाली जाएगी। यात्रा कथा स्थल पहुंचकर समाप्त होगी। शाम 4 बजे विधायक सभागृह में कथा आरंभ होगी।

विधायक सभागृह में होने वाली श्रीमद् भागवत कथा की तैयारियों का जायजा लेते और व्यवस्थाओं के निर्देश देते विधायक व राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप।

कथा में कब, क्या

24 मई- देवर्षि नारद पूर्व जन्म शुकदेव आगमन

25 मई- सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, अजामिलोपाख्यान

26 मई- प्रहलाद चरित्र व श्रीराम जन्म के साथ श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग

27 मई- श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं व गोवर्धन पूजा

28 मई- गोपी गीत, कंस वध, भ्रमर गीत, रुक्मिणी विवाह

29 मई- सुदामा चरित्र, परीक्षित को अंतिम उपदेश के साथ कथा का विश्राम।

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