कोई भी करदाता धारा 148 में प्राप्त नोटिस को हल्के में ना ले। नोटिस प्राप्त होते ही विधिक सलाह लें। यह नोटिस प्राप्त होने के 30 दिनों में अपने आर्थिक व्यवहार को पुन: देखकर आयकर विवरणी फाइल करना होती है। उक्त धारा में नोटिस जारी करने से पहले विभाग के अधिकारी को पूर्ण विश्वास होना चाहिए कि कुछ आय कर के दायरे से बाहर रह गई है। अगर बिना पूर्ण तैयारी और केवल जांच के लिए नोटिस जारी होता है तो कई न्यायालयीन फैसलों के अनुसार यह नोटिस अवैध हो जाएगा। इन नोटिस के दायरे में ऐसे भी लोग आए हैं जो नियमित विवरणी फाइल नहीं कर रहे हैं।
द इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की न्यू रोड स्थित ब्रांच पर आयकर अधिनियम के रिअसेसमेंट के प्रावधान के साथ वित्त के साधन के रूप में विभिन्न योजनाओं में उपलब्ध सब्सिडी पर सेमिनार में यह बात इंदौर के सीए पंकज शाह ने कही। इंदौर से आए सीए समकित भंडारी ने उद्योग सेवा और व्यापार के लिए वित्त के साधन के रूप में उपलब्ध कई योजना और उसमें उपलब्ध सब्सिडी जिसमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, पढ़ो परदेश योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, पूंजी अनुदान योजना आदि में उपलब्ध अनुदान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। प्रारंभ में प्रमोद नाहर, गौरव गांधी, अभिषेक रांका, पंकज जैन और निशित जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। चेयरमैन जितेंद्र कांसवा ने स्वागत भाषण दिया। साथ ही वाइस चेयरमैन अर्पित शर्मा और सिकासा चेयरमैन अमित वाच्छानी ने अतिथि परिचय दिया। अंत में रजनीश जैन, अंकित बरमेचा, निखिल काकानी, मनीष गुगलिया, प्रणेता जैन, मेघा मित्तल, पलक काकानी और महक काकानी ने अतिथियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए। संचालन सेक्रेटरी दीपेंद्र चौपड़ा ने किया। आभार ट्रेजरार पवन श्रीमाल ने माना।
सेमिनार में मौजूद सीए और कर सलाहकार।