रतलाम | गुस्सा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ ही मानसिक परेशानियों को भी बढ़ाता है। यह सामान्य ढंग से काम करने की क्षमता भी प्रभावित करता है। बार-बार गुस्सा अाने से निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ता है और सामाजिक प्रतिष्ठा भी कम होती है। गुस्से से शारीरिक व आर्थिक दोनों नुकसान होते हैं। जब भी गुस्सा आए गहरी ठंडी सांस लें। स्वयं को कुछ समय के लिए रोकें व मानसिक एकाग्रता बनाए रखें।
एक पादासन : विधि : जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को पास-पास रखें। घुटने सीधे रख दोनों हाथों को सीधा रखें और दोनों की उंगलियों को एक-दूसरे में फंसा कर मुट्ठी की तरह बांध लें और फिर सिर के ऊपर ले जाएं। इस दौरान श्वास अंदर लेकर शरीर धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाएं। बायां पैर धीरे-धीरे पीछे की आेर उठाते हुए शरीर के ऊपरी भाग सिर, कमर व दोनों हाथों के साथ-साथ बाएं पैर को एक सीधी रेखा में ले आएं। इस स्थिति में पैर व हाथ एकदम सीधे रहें। ध्यान केंद्रित करें। मन में ओम् का उच्चारण करते रहें। आसन की आरामदायक स्थिति में जितनी देर रह सकें, रहें। श्वास छोड़ते हुए पुन: सामान्य स्थिति में आ जाएं। यह क्रिया दूसरे पैर से भी करें। आंखें खुली रखें व सामने देखेंं। यह क्रिया 5 से 10 बार दोहराएं। आसन सामर्थ्य अनुसार करें।
लाभ- मानसिक तनाव व चिंता दूर करता है। ध्यान केंद्रित करने के साथ रक्त संचार सभी नाडिय़ों तक पहुंचाता है। हाथों, कंधों, पिंडलियों, जंघाओं, कमर को पुष्टकर शक्ति प्रदान करता है।
- आशा दुबे, जिला योग प्रभारी, रतलाम