आज सनातन धर्म का विरोध करना फैशन बन गया है। सनातन धर्म के तथ्यों को गलत परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। समाज की श्रद्धा को खंडित करने के लिए अवतारवाद, मूर्तिवाद, संत, तीर्थ और आस्था के केंद्रों को टारगेट किया जा रहा है। इससे समाज को सचेत रहना होगा। यदि भारत में एक समय पर शंखनाद, घंटानाद, आरतियां और पूजन होने लगे तो सभी आसुरी आत्माओं का नाश और धर्म-संस्कृति की रक्षा होगी। इससे धर्मधरा भारत का पुरातन दिव्य आध्यात्मिक स्वरूप बनेगा।
यह बात महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वतीजी महाराज ने कालिकामाता मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा में कही। कथा का आयोजन श्रीहरिहर सेवा समिति एवं भट्ट परिवार द्वारा किया जा रहा है। आयोजक मोहनलाल भट्ट, श्यामा भट्ट, बीएल पुरोहित ने पोथी पूजन किया। कथा प्रसंग में महिषासुर वध सहित अन्य का वर्णन किया। चिदंबरानंदजी ने कहा जिस तरह मां भगवती से प्रकट होने के लिए सभी सामूहिक रूप से स्तुति करते हैं। ठीक उसी तरह हमें भी अपनी सभी इंद्रियों को मिलाकर स्तुति करना चाहिए। जब सभी इंद्रियां संयुक्त होकर स्तुति करेंगी तो मां भगवती का आशीष प्रकट होगा। इंद्रियों को वश में करकर स्तुति से विशेष प्रभाव होगा। हमारे यहां जितने भी अवतार हुए हैं, वे सभी देवी भगवती की प्रेरणा से हुए। सभी का उद्देश्य जनमन में काल और परिस्थिति के अनुरूप धर्म और संस्कृति की रक्षा के साथ सनातन सत्य की संस्थापना रहा है। भगवान का कल्कि अवतार कलियुग की आयु 4 लाख 32 हजार वर्ष पूर्ण होने पर होगा। अभी केवल लगभग साढ़े पांच हजार वर्ष से अधिक का समय बीता है। कल्कि अवतार को अभी बहुत अधिक समय शेष है लेकिन लोगों की धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करते हुए जो खुद को कल्कि अवतार बताते हैं, वो पाखंडी हैं। ऐसे श्रद्धा का दोहन करने वालों से समाज को सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा हमारी संस्कृति ने सदैव सर्वे भवंतु सुखिनः की मंगल कामना विश्व जन समाज के लिए की है। देवी भागवतजी की आरती एवं स्वागत भूपेंद्र गुलाटी उज्जैन आदि ने किया। संचालक सुनील भट्ट ने वंदना प्रस्तुत की।
कालिकामाता मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद देवी भागवत कथा में स्वामी चिदंबरानंदजी ने बताया धर्म-संस्कृति का महत्व
कालिकामाता मंदिर परिसर में आयोजित कथा में उपस्थित श्रद्धालु। इनसेट- स्वामी चिदंबरानंद।