श्री, यश, ज्ञान, धैर्य, वैराग्य व धर्म जिसमें है, वही भगवान है
रतलाम | श्री, यश, ज्ञान, धैर्य, वैराग्य और धर्म ये 6 बातें जिसके अंदर हैं, वह भगवान है। कोई कितना बड़ा कामी है या निष्कामी, उसका प्रमाण उसकी शय्या है। जानना हमको राम को है, भगवान राम ही विष्णु के अवतार और लक्ष्मण शेषनाग के रूप में उनकी शय्या हैं। भगवान का चातुर्मास में शेषनाग पर शयन है। लक्ष्मण के रूप में शेषनाग बताते हैं कि भगवान को मुझ से ज्यादा कौन जान सकता है कि वह कामी हैं या निष्कामी। लक्ष्मी को एेश्वर्य की देवी माना जाता है लेकिन वह विष्णुजी के पैर दबा रही हैं। पुरुष के चरणों में शनि का वास है और नारी के हाथों में शुक्र का वास है। सारे ग्रहों का मालिक सूर्य है पर शनि दबता है तो केवल शुक्र से दबता है। यदि घर में सुख, शांति और समृद्घि चाहिए तो नारी को अपने पति के पैर दबाना चाहिए। यह बात भानपुरा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंदजी तीर्थ ने पूर्व धर्मस्व मंत्री स्व. पं. मोतीलाल दवे द्वारा स्थापित 37वें अखिल भारतीय रामायण मेले के चौथे दिन ग्राम जड़वासा खुर्द में कही। 21 मई से 25 मई तक ग्राम हरथली में रामायण मेले का आयोजन शाम 7.30 से रात 11 बजे तक किया जाएगा। मानस मर्मज्ञ, पं. अखिलेश उपाध्याय ने परिश्रम करें कोई कितना प्रभु कृपा के बिना काम नहीं होता... भजन सुनाया। उन्होंने कहा भगवान के लिए दु:ख और प्रसन्नता एक समान है। हमारे भरपूर प्रयास के बाद किसी काम में सफलता नहीं मिलती है तो उसे भगवान की मर्जी पर छोड़ देना चाहिए।