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पार्षद बोले- सम्मेलन बुलाएं न बुलाएं, हमें कुछ नहीं कहना, पार्षदों को बिकाऊ कहने वाले को समझा लें

3 वर्ष पहले
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नगर निगम सम्मेलन नहीं बुलाने को लेकर पार्षदों व निगम अध्यक्ष के बीच चल रहा शीतयुद्ध तूल पकड़ता जा रहा है। बात बिगड़ने लगी है। बिकाऊ व ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए अपमानित किए जाने वाले शब्दों का इस्तेमाल होने लगा है। शनिवार शाम ऐसी बातों से गुस्साए पार्षदों ने जिलाध्यक्ष कानसिंह चौहान से दो-टूक बात की। चौहान ने पूरी बात सुनी और समाधान का भरोसा दिलाया। हिदायत दी कि बात बाहर मीडिया में नहीं जाए।

पार्षदों ने निगम अध्यक्ष की मनमानी कार्यशैली व पार्षदों के लिए अपशब्दों के इस्तेमाल करने के किस्से सुनाए। इस दौरान नेता पक्ष प्रेम उपाध्याय, एमआईसी सदस्य भगत भदौरिया, सूरज जाट, मंगल लोढ़ा, मनीषा शर्मा, रेखा जौहरी, मोनिका सोनी, ताराचंद पंचोनिया आदि मौजूद रहे। इस सम्बंध में जिलाध्यक्ष चौहान से चर्चा के लिए कई कॉल किए मगर वे कॉल अटैंड नहीं कर पाए। मैसेज पर भी रिप्लाय नहीं मिल सका।

नगर निगम अध्यक्ष द्वारा सम्मेलन नहीं बुलाए जाने को लेकर संगठन में सिर फुटव्वल की नौबत आने लगी, पार्टी कार्यालय में एक घंटे तक चली पार्षदों और भाजपा जिलाध्यक्ष की बात
राजधानी स्तर के पदाधिकारी करवा रहे हैं जांच
निगम सम्मेलन को लेकर मची खींचतान की जड़ में 1.59 करोड़ में बनने वाला श्मशान माना जा रहा है। एक धड़ा इसे त्रिवेणी में बनवाना चाहता है जबकि दूसरे धड़े को त्रिवेणी की जगह पसंद नहीं जबकि त्रिवेणी में ही सबसे ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार होता है। संगठन इस विवाद को सुलझाने में भी नाकाम ही रहा जिससे बात और बिगड़ने लगी है। दबी जुबान पार्षद बोले- संगठन का दखल न होने के कारण भी कुछ लोगों के हौसले बढ़ गए है। निगम अध्यक्ष और पार्षदों के बीच तल्खी बढ़ी है। यही नहीं इस खींचतान में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का नाम भी घसीटा जा चुका है। भनक लगने पर राजधानी के पदाधिकारी अपने स्तर पर मामले की जांच करवा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पदाधिकारी भी इस बिंदु को एजेंडे से हटाने के पक्ष में है। यही सब वजहें हैं जिसके दम पर निगम अध्यक्ष पार्षदों के विरोध के सामने डंटे हुए हैं।

आठ माह से नहीं हुआ नगर निगम का सम्मेलन
अंतिम बार नगर निगम परिषद सम्मेलन 30 अक्टूबर को हुआ था। इसके बाद से अब तक न साधारण सम्मेलन हो पाया है और न ही बजट सम्मेलन। मार्च में एमआईसी के बजट पास करने के बाद महापौर 31 मार्च को तारीख सुझाकर एजेंडा भेज चुकी हैं।

पार्षदों से तालमेल बैठाकर चलना चाहिए अध्यक्ष को
सम्मेलन नहीं बुलाने को लेकर जिलाध्यक्ष से बात हुई। कुछ ने अध्यक्ष द्व‌ारा पार्षदों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने की भी जानकारी दी है। अध्यक्ष को पार्षदों से तालमेल बैठाकर चलना चाहिए। प्रेम उपाध्याय, नेता पक्ष- नगर निगम

संगठन जो भी निर्णय करेगा उसका पालन करेंगे
पार्षदों ने संगठन तक अपनी बात पहुंचा दी है। वहां से जो भी निर्णय होगा वह सर्वमान्य है। उसका पालन करते हुए आगे कदम बढ़ाएंगे। पार्षदों तो हमारे सम्माननीय है। अशोक पोरवाल, अध्यक्ष- नगर निगम

महामंत्री व उपाध्यक्ष को बंद ट्यूबवेल दिखा बोलीं महिलाएं- डेढ़ माह से खरीद रहे पानी
डेढ़ महीने से बंद पड़े ट्यूबवैल को लेकर बरबड़ की महिलाओं का गुस्सा शनिवार को उस समय फूटा जब विधायक सभागृह में भाजपा ग्रामीण विधानसभा सम्मेलन चल रहा था। महिलाओं ने आक्रोश जताना शुरू किया तो जिला महामंत्री प्रदीप उपाध्याय व उपाध्यक्ष विष्णु त्रिपाठी समझाने पहुंचे। गुस्से से भरी महिलाएं उनका हाथ पकड़कर बंद पड़े ट्यूबवैल तक ले गई। दिखाकर बोली इसे सुधरवाने के लिए निगम से मैकेनिक बुलवाए थे, वे मोटर में स्टार्टर निकालकर ले गए। तब से पानी खरीदकर पी रहे हैं। निगम के टैंकर नहीं आ रहे। पार्षद पप्पू पुरोहित भी नहीं सुन रहे। हेमलता पंड्या, मंजू गुर्जर, फूलकुंवर बाई, तारा जाट, विमला प्रजापत सहित अन्य महिलाओं ने पदाधिकारियों को स्पष्ट बोल दिया समस्या हल नहीं कर पाओ तो वोट मांगने मत आना, जूते मिलेंगे। जिला महामंत्री उपाध्याय ने बताया मैकेनिक को स्टार्टर ठीक करने के लिए बोल दिया है। रविवार से रहवासियों को पानी मिलने लगेगा। पार्षद पुरोहित ने बताया मोटर में कुछ खराब हो गई है, उसे ठीक करवा रहे हैं। पानी के टैंकर भी भेजे हैं।

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