प्रशासन की जिस जमीन पर कर्मचारी कॉलोनी काटने की तैयारी वह कालिकामाता मंदिर की है
अनाज मंडी के सामने जिस जमीन पर प्रशासन सरकारी कर्मचारियों के लिए आवास बनाने की तैयारी कर रहा है वो जमीन कालिकामाता मंदिर की है। राजस्व रिकॉर्ड में भी यह जमीन मंदिर के नाम ही है। इससे संत और पुजारी नाराज हैं और वे कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
कालिकामाता मंदिर के साथ यह जमीन मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी को दी थी ताकि वो भरण पोषण कर सकें। राजस्व रिकॉर्ड में भी इसका जिक्र है। ऐसे में यदि जमीन पर आवास बनते हैं तो पुजारी के भरण-पोषण में दिक्कत होगी। कालिकामाता मंदिर सालों पुराना है और राजा के समय अनाज मंडी के सामने स्थित कृषि मंडी की जमीन पुजारी के भरण-पोषण के लिए दे रखी है। दरअसल मंदिरों के साथ जो भूमि दी गई हैं वो पुजारियों के भरण-पोषण के लिए ही है क्योंकि पुजारियों को 250 से 500 रुपए मानदेय मिलता है। जिन मंदिरों के नाम पर दस बीघा से कम कृषि भूमि है उन मंदिरों के पुजारियों को 500 रुपए और दस बीघा से ज्यादा भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों को 250 रुपए महीना मानदेय मिलता है।
धर्मस्व विभाग से अनुमति के बाद ही लेंगे निर्णय- कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया अभी जमीन देखी है। धर्मस्व विभाग की अनुमति के बाद ही आगे निर्णय लेंगे।
पहले भी अजब कुंज बिहारी मंदिर की जमीन ली थी, 6 लाख रु. बकाया
35 लाख में ही बेच दी थी जमीन
धानमंडी स्थित अजब कुंज बिहारी मंदिर की 1990 से पहले 210 बीघा जमीन थी। अब 18 बीघा ही बची है। मंदिर की जमीन पर अभी डोंगरानगर बना है। उस दौरान हुडको ने 9.80 करोड़ रुपए जमीन के दाम बताए थे। मंदिर की इस जमीन को 35 लाख रुपए में बेच दी थी। इसमें से भी अब तक 26 लाख रुपए ही जमा हुए हैं। शेष राशि आज तक जमा नहीं हुई है। पुजारी समाज द्वारा राशि के लिए कई बार लिखा जा चुका है लेकिन अब तक राशि नहीं मिली है। मंदिर की एक के बाद एक जमीनें बेची गईं और अब मंदिर के नाम पर 18 बीघा ही जमीन बची है।
याचिका लगाएंगे
धर्म समाज पुजारी संघ संयोजक हरीश चतुर्वेदी ने बताया शासन ने भगवान को नाबालिग माना है। इससे उसका व्यवस्थापक कलेक्टर को बनाया है। इसके बाद भी मंदिरों की जमीन बेची जा रही है। केवल मंदिरों की जमीन क्यों बेची जा रही है। अन्य धर्मों के पूजा घरों की जमीन है। मंदिरों को जमीन आज नहीं मिली है। राजा-महाराजाओं ने मंदिर की व्यवस्था के लिए दी थी। धीरे- धीरे इन्हें बेचा जा रहा है। अजब कुंज बिहारी मंदिर की जमीन भी धीरे-धीरे बेच दी गई।